तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में संत ब्रजराज पुरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। संत समाज और परिजनों की मांग के बाद मृत्यु के करीब 5 दिन बाद गुरुवार को संत की समाधि खोदकर शव बाहर निकाला गया और डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया।
महंत ब्रजराज पुरी का 5 अप्रैल को निधन हो गया था, वे ओंकार पर्वत स्थित ओंकार बिंदु पर निवास करते थे। निधन के दिन ही दोपहर में जल्दबाजी में उन्हें संत परंपरा के अनुसार समाधि दे दी गई लेकिन इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हो गया।
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संत ब्रजराज पुरी की मौत पर गहराया विवाद
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन का एक्शन, 5 घंटे चली प्रक्रिया
संतों और परिजनों द्वारा संदेह जताए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम की अनुमति के बाद थाना मांधाता पुलिस, नायब तहसीलदार उदय मंडलोई और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। करीब 5 घंटे चली कार्रवाई के बाद समाधि को खोदकर शव बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम किया गया। डॉक्टरों के अनुसार शव के विभिन्न अंगों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
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5 घंटे की मशक्कत के बाद निकाला शव
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मोबाइल, चेन और नकदी गायब- हत्या की आशंका
संत ओंकार दास उदासीन (राजेंद्र वर्मा) और मृतक के परिजनों ने प्रशासन को ज्ञापन देकर दावा किया था कि महंत के दो मोबाइल फोन, सोने की चेन और नगदी गायब हैं। इन तथ्यों के आधार पर हत्या की आशंका जताई गई और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
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ट्रस्ट की जमीन को लेकर उठा विवाद
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ट्रस्ट की जमीन को लेकर भी उठा विवाद
मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी सामने आया कि मृत्यु से दो दिन पहले महंत ब्रजराज पुरी ने सोशल मीडिया पर ट्रस्ट की 73 एकड़ जमीन में गड़बड़ी और नाम परिवर्तन को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने खुद को ट्रस्ट से हटाने और झूठे केस में फंसाने की बात भी कही थी। इससे उनकी मौत को लेकर संदेह और गहरा गया।
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जांच में जुटी पुलिस
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क्या था मामला
गौरतलब है कि महंत ब्रजराज पुरी महाराज का 5 अप्रैल को निधन होने के तुरंत बाद उसी दिन दोपहर में उन्हें संत परंपरा के अनुसार समाधि दे दी गई थी। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शुरू से ही सवाल उठने लगे थे। संत समाज के एक वर्ग और परिजनों का आरोप था कि इतनी जल्दी और सभी संतों की मौजूदगी के बिना अंतिम संस्कार करना संदेह पैदा करता है।