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MP News: ढाई दशक बाद भी नहीं हो सकी हुकुमचंद नारद पत्रकारिता पीठ की स्थापना, घोषणा के बाद भूल गई सरकार

Wed, 13 Nov 2024 07:25 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 13 Nov 2024 07:25 PM IST
सार

नारदजी की स्मृति को बढ़ाने और उनके योगदान को याद रखने जबलपुर में उनके नाम से पत्रकारिता पीठ की स्थापना अब तक नहीं हो सकी है। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की घोषणा को ही ढाई दशक बीत गए पर शासन-प्रशासन ने इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया। 

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MP News: Hukumchand Narada Journalism Chair could not be established even after two and a half decades
हुकुमचंद नारद को श्रमजीवी पत्रकारिता का जनक कहा जाता है। - फोटो : अमर उजाला
एक मुख्यमंत्री की घोषणा ढाई दशक बाद भी पूरी नहीं हो, ये बात हैरान करती है पर ये सच है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुकुमचंद नारद पत्रकारिता पीठ की स्थापना इसका उदाहरण है। भरे सार्वजनिक मंच से पत्रकारों के बीच उस वक्त के मुख्यमंत्री ने इसकी स्थापना की घोषणा की थी, पर अब तक ये अधूरी है। इस ढाई दशक में आधा दर्जन मुख्यमंत्री बने परंतु किसी ने भी पत्रकारों के समक्ष की गई घोषणा को पूरा करने की कोई पहल नहीं की। 

 
MP News: Hukumchand Narada Journalism Chair could not be established even after two and a half decades
जबलपुर में नारदजी की प्रतिमा लगाई गई है। सड़क का नामकरण भी किया गया है। - फोटो : अमर उजाला
हुकुमचंद नारद के पोते विकास निर्मल नारद का कहना है कि मेरे दादा हिंदुस्तान के प्रथम श्रमजीवी पत्रकार रहे। जिन्होंने श्रमजीवी पत्रकारिता का प्रादुर्भाव किया। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए मप्र सरकार द्वारा 29 मई 1999 जबलपुर के सिविक सेंटर में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया था। जगतगुरु शंकराचार्य भी उपस्थित रहे थे। उस वक्त के सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि नारदजी की स्मृति को बढ़ाने और उनके योगदान को याद रखने जबलपुर में उनके नाम से पत्रकारिता पीठ की स्थापना की जाएगी। सीएम की घोषणा को 25 साल बीत गए हैं, पर शासन-प्रशासन की ओर से कुछ नहीं किया गया। पत्रकार संघ ने कई बार इस संबंध में पत्र व्यवहार किया गया। हम निवेदन करते हैं कि पीठ की स्थापना के लिए उचित कदम उठाया जा सके। 
 
MP News: Hukumchand Narada Journalism Chair could not be established even after two and a half decades
नारदजी की स्मृति - फोटो : फाइल फोटो
कौन हैं हुकुमचंद नारद
स्वर्गीय हुकुमचंद नारद को श्रमजीवी पत्रकारिता को पितामह माना जाता है। ब्रिटिश काल में हुकुमचंद नारद ने साल 1922 में सतना से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। रीवा रियासत के राजा मार्तण्ड सिंह के खिलाफ लिखने के कारण प्रताड़ित होकर उन्हें मजबूरन जबलपुर आना पड़ा। जबलपुर आने के बाद उन्होंने कपड़ा व्यापारी के लिए साइकिल पर फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम प्रारंभ किया और साथ में पत्रकारिता भी जारी रखी। इसके साथ ही वे स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से भी जुड़े रहे। इसके कारण उनके घर पर ब्रिटिश शासन काल में कई बार दबिश दी गई थी। पत्रकारिता तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के कारण उन्हें तीन बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने विदेश तथा देश के कई राष्ट्रीय अखबारों के लिए फ्रीलांसर के रूप में पत्रकारिता की थी। इसके कारण उन्हें श्रमजीवी पत्रकारिता का पितामह कहा जाता है।
 
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MP News: Hukumchand Narada Journalism Chair could not be established even after two and a half decades
नारदजी की स्मृति - फोटो : फाइल फोटो
सीएम की घोषणा की हुई हवा
पत्रकारिता में उनके अतुलनीय योगदान के कारण मरणोपरांत सरकार की तरफ से सिविक सेंटर में उनके मानव कद की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई। इसका अनावरण तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा, पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल, तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी सहित कई मंत्री तथा भाजपा तथा कांग्रेस के कई विधायक व नेता शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मई 1999 को हुकुमचंद नारद पत्रकारिता पीठ स्थापित किए जाने की घोषणा की थी। इस दौरान नगर के सभी प्रतिष्ठित अखबारों के पत्रकार भी उपस्थित थे। लेकिन आज भी इसकी स्थापना नहीं हो सकी।  
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