रालामंडल सनावदिया की सुरम्य वादियों में एक अनोखा आयोजन हुआ। बिना किसी पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के मध्यप्रदेश के 23 जिलों के सात हजार कार्यकर्ता एक मंच पर जुटे। आयोजन था पांडुरंग शास्त्रीजी आठवले "दादाजी" से प्रेरित मध्य प्रदेश के Swadhyay Parivar स्वाध्याय परिवारों का मिलन समारोह। इसमें पूरे प्रदेश से आए लगभग सात हजार कार्यकर्ताओं से दादाजी की पुत्री जयश्री तलवलकर (Jayshree Talwalkar) "दीदीजी" व्यक्तिगत रूप से मिलीं।
आज के इस कार्यक्रम का सारा अनुशासन एवं व्यवस्थाएं स्वाध्याय परिवार के कृतिशीलों ने संभाली। परिवार के कृतिशील युवानों ने यातायात और वाहन पार्किंग की व्यवस्था मुस्तैदी से संभाली। आमजनों को किसी भी तरह की परेशानी न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा गया। दीदीजी ने सभी परिवार जनों से बात करते हुए इंदौर की स्वच्छता और प्रगति की तारीफ की। साथ ही, आतंरिक स्वच्छता जो हमारे ऋषियों और दादाजी के द्वारा दिए गए विचारों और प्रयोगों से प्राप्त की जा सकती है, इस पर भी जोर दिया।
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रालामंडल सनावदिया में आयोजित कार्यक्रम।
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
आज मध्य प्रदेश के 23 जिलों में पिछले 48 वर्षों से दादाजी द्वारा दिए गए विचार और प्रयोग सुव्यवस्थित चल रहे हैं। 278 योगेश्वर कृषि, 13 अमृतालयम, 1000 से ज्यादा स्वाध्याय केंद्र और 1 वृक्ष मंदिर, इत्यादि प्रयोग सुचारू रूप से चल रहे हैं। आज सभी जगह लेनदेन दान चंदा इत्यादि दिखाई देता है, वहीं इस कार्य में किसी भी तरह का लेना देना बंद है। किसी भी तरह के वित्तीय व्यवहार के बिना यह कार्य पूरे भारत और विश्व के लगभग ४० देशों में एक विचार एक आचार के पद्धति से चल रहा है और भारतीय संस्कृति की खूशबू पूरे विश्व में बिखेर रहा है। दादाजी को इस कार्य के लिए अनेकानेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। जिनमें अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा दिया गया रेमैन मेगसेसे और विश्व प्रतिष्ठित टेम्पलटन पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए पद्मविभूषण, इंदिरा वृक्षमित्र पुरस्कार मुख्य रूप से शामिल हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी दादाजी को देवी अहिल्या पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।