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Omakareshwar: श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का संगम, ओंकारेश्वर में बेलपत्र और फूलों से बनेगी अगरबत्ती-धूपबत्ती

Fri, 30 May 2025 10:18 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 30 May 2025 10:18 PM IST
सार

ओंकारेश्वर धाम में अब पूजन के बाद अर्पित बेलपत्र और फूलों से अगरबत्ती-धूपबत्ती बनाई जाएगी। यह पहल महिलाओं को रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान सुनिश्चित करती है। स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। यह एक संतुलित, संवेदनशील और आदर्श प्रशासनिक मॉडल है।

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incense sticks and dhoopbatti will be made from Belpatra and flowers in Omkareshwar
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट में बेलपत्र फूल से अगरबत्ती बनाती हुई समूह की महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री ओंकारेश्वर धाम अब केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक मॉडल भी बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन और ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के संयुक्त प्रयासों से अब भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र और फूलों से अगरबत्ती व धूपबत्ती का निर्माण किया जाएगा।


खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के अनुसार, प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पूजन के लिए ओंकारेश्वर पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में बेलपत्र व फूल अर्पित करते हैं। पहले इन पूजन सामग्रियों का सीमित उपयोग कर जैविक खाद बनाई जाती थी, लेकिन संग्रहण की कठिनाइयों के चलते अधिकतर सामग्री व्यर्थ जा रही थी, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती थीं।

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incense sticks and dhoopbatti will be made from Belpatra and flowers in Omkareshwar
बेलपत्र फूल से तैयार किया गया अगरबत्ती धूप बत्ती - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का अवसर
अब मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन द्वारा "ओंकार प्रसाद परिसर" में एक विशेष इकाई स्थापित की गई है। यहां "ओंकारेश्वर शिवशक्ति महिला सहायता समूह" की महिलाएं इन सामग्रियों से अगरबत्ती और धूपबत्ती का निर्माण करेंगी। यह पहल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराएगी, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

स्थानीय व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
निर्मित उत्पाद ओंकारेश्वर नगर के किराना और जनरल स्टोर्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे स्थानीय व्यापारियों को लाभ मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। इस योजना से पूजन सामग्री का पुनः उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे कचरा प्रबंधन सुधरेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। 

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कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने इसे श्रद्धा, स्वावलंबन और सतत विकास का एकीकृत मॉडल बताते हुए कहा कि यह पहल देश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सकती है। स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और महिला समूहों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे "संवेदनशील और संतुलित प्रशासनिक पहल" बताया है।
 
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