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पवित्र नदी महोत्सव: लोकप्रिय गजलों और कथक से हुआ आगाज, कठपुतली कला ने विदेशियों का मन मोहा
Fri, 07 Feb 2025 07:54 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 07 Feb 2025 07:54 PM IST
सार
मां नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में इन दिनों कला की लहरें हिलोरे ले रही हैं। तीन दिवसीय ‘पवित्र नदी महोत्सव’ में एक से एक बढ़कर प्रस्तुतियां हो रही हैं। कल महोत्सव का अंतिम दिन है।
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पवित्र नदी महोत्सव में कथक की शानदार प्रस्तुति हुई।
- फोटो : अमर उजाला
देवी श्री अहिल्या बाई होलकर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में तीन दिवसीय ‘पवित्र नदी महोत्सव’ आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन रेवा सोसाइटी प्रांगण में कठपुतली से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कठपुतली कला ने विदेशियों का मन मोह लिया। पहले दिन सुप्रसिद्ध गजलकार जितेन्द्र सिंह जामवाल ने गजलों से समां बांधा और प्रसिद्ध नृत्यांगना ज्योत्सना सोहनी ने कथक का अनुपम प्रदर्शन किया।
महेश्वर में महोत्सव के दूसरे दिन कठपुतली नृत्य से विदेशी भी मोहित हो गए।
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को गुरु गणपत मसगे, बालकृष्ण गणपत मसगे एवं साथी कलाकारों की 11 लोगों की टीम (पिंगूली गांव महाराष्ट्र) ने आदिवासी समुदाय की कला को समेटे हुए महाभारत कालीन युद्ध होने के बाद की कथा सौरी भीषण प्रस्तुत किया। यह लोक कला ठाकर समुदाय की 12 लोक कला में से एक है। कठपुतली टीम के प्रमुख गुरु गणपत मसगे ने बताया कि निमाड़ मालवा में पहली बार इस प्रकार की प्रस्तुति दी जा रही है। हमारी छह पीढ़ियां इसी काम को कर रही हैं। इनके बाद पद्मश्री कालूराम बामनिया टोंकखुर्द (देवास) से कबीर भजन की प्रस्तुति देने पहुंचे जो कि पिछले 9 वर्ष की उम्र से गा रहे हैं, जो उनको पिता देवीलाल बामनिया एवं दादा राम बामनिया से विरासत में मिला है। कालूराम बामनिया मुख्य रूप से कुमि ग्राम कन्हेरिया के रहने वाले हैं। गुरु वंदना 'गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन...' से कबीर भजनों की शुरुआत की। जिसके बाद मन लगा यार मेरा फकीरा में, सदा नाम रस बिनी चादर झीनी, घणा दिन सो लियो अब तो जाग मुसाफिर सहित अन्य कबीर भजनों से दर्शकों के बीच समा बांध दिया। उनके साथ साथी कलाकार हारमोनियम पर राम प्रसाद परमार, ढोलक पर दीपक नेमा, नगाड़े पर सज्जन परमार, सह गायक उत्तम सिंग बामनिया थे।
पवित्र नदी महोत्सव में गजलों ने समां बांध दिया
- फोटो : अमर उजाला
पहला दिन शास्त्रीय संगीत और नृत्य के नाम रहा
गुरुवार को सुप्रसिद्ध गजलकार जितेन्द्र सिंह जामवाल ने गजलों से समां बांधा। गजलों की दुनिया में जितेंद्र सिंह जामवाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके चाहने वालों का बड़ा समूह देश-विदेश में है।
दूसरे सत्र में शाम 7:15 बजे प्रसिद्ध कथक कलाकार गुरु ज्योत्सना सोहनी ने शिव स्तुति ‘शंकर महादेव देवम जय-जय गिरिजा पति’ से शुरुआत की। इस प्रस्तुति में उनका साथ पार्णिका बोड़स, प्राजक्ता दातार, प्रीसियस पाटीदार ने दिया। इसके बाद बिंदादिन महाराज द्वारा रचित ठुमरी ‘सब बन ठन आई’ के साथ अन्य ठुमरी पर भी प्रस्तुतियां दी गई। शास्त्रीय नृत्य कथक को समझने वालों के लिए यह सुनहरा अवसर था। दोनों ही आयोजनों को श्रोताओं ने मन से सुना और भरपूर दाद भी दी। गुरुवार को सर्वप्रथम राज परिवार के सदस्यों ने नर्मदा घाट पर जाकर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया। आयोजन में मुख्य रूप से ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवाजी राव होलकर, युवराज यशवंत राव होलकर के साथ नगर के गणमान्य और देसी विदेशी मेहमान शामिल हुए।
गुरुवार को सुप्रसिद्ध गजलकार जितेन्द्र सिंह जामवाल ने गजलों से समां बांधा। गजलों की दुनिया में जितेंद्र सिंह जामवाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके चाहने वालों का बड़ा समूह देश-विदेश में है।
दूसरे सत्र में शाम 7:15 बजे प्रसिद्ध कथक कलाकार गुरु ज्योत्सना सोहनी ने शिव स्तुति ‘शंकर महादेव देवम जय-जय गिरिजा पति’ से शुरुआत की। इस प्रस्तुति में उनका साथ पार्णिका बोड़स, प्राजक्ता दातार, प्रीसियस पाटीदार ने दिया। इसके बाद बिंदादिन महाराज द्वारा रचित ठुमरी ‘सब बन ठन आई’ के साथ अन्य ठुमरी पर भी प्रस्तुतियां दी गई। शास्त्रीय नृत्य कथक को समझने वालों के लिए यह सुनहरा अवसर था। दोनों ही आयोजनों को श्रोताओं ने मन से सुना और भरपूर दाद भी दी। गुरुवार को सर्वप्रथम राज परिवार के सदस्यों ने नर्मदा घाट पर जाकर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया। आयोजन में मुख्य रूप से ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवाजी राव होलकर, युवराज यशवंत राव होलकर के साथ नगर के गणमान्य और देसी विदेशी मेहमान शामिल हुए।
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कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कालूराम बामनिया
- फोटो : अमर उजाला
पवित्र नदी महोत्सव में कल
शनिवार 8 फरवरी को महोत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन का समापन भी संगीत के साथ ही होगा। समापन समारोह के पहले सत्र में प्रसिद्ध वायलिन वादिका अनुप्रिया देवताले का वायलिन वादन होगा। समारोह की अंतिम प्रस्तुति सुप्रसिद्ध मैहर बैंड के साथ इसी दिन होगी।
शनिवार 8 फरवरी को महोत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन का समापन भी संगीत के साथ ही होगा। समापन समारोह के पहले सत्र में प्रसिद्ध वायलिन वादिका अनुप्रिया देवताले का वायलिन वादन होगा। समारोह की अंतिम प्रस्तुति सुप्रसिद्ध मैहर बैंड के साथ इसी दिन होगी।
