मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ की तैयारी में राजधानी भोपाल गुरुवार को लोक संगीत, नृत्य और रंगों से सराबोर रही। शहर के अलग-अलग मार्गों पर भव्य सांस्कृतिक यात्राएं निकाली गईं, जिनमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों और जनजातीय समुदायों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। यात्राओं के दौरान ढोल-ढमाकों की थाप, लोकगीतों की मधुर ध्वनि और कलाकारों के पारंपरिक नृत्यों ने राजधानी की सड़कों को उत्सवमय बना दिया। लोग इन झांकियों और नृत्य दलों को देखने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। कई जगह लोग कलाकारों के साथ सेल्फी लेते नजर आए। सांस्कृतिक यात्राएं दोपहर 2 बजे से शहर के कई प्रमुख मार्गों से शुरू हुईं।
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सांस्कृतिक यात्राओं में नृत्य करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
बैरागढ़ से शुरू हुई यात्रा लालघाटी, शाहजहांनाबाद होते हुए हमीदिया अस्पताल चौराहे तक पहुंची। इस यात्रा में उज्जैन की सुश्री स्वाति उखले और साथी कलाकारों ने मालवा का प्रसिद्ध ‘मटकी नृत्य’ प्रस्तुत किया, जबकि बैतूल के अर्जुन बाघमारे दल ने ठाठ्या नृत्य से सभी का मन मोह लिया। सीपेट जेके रोड से शुरू हुई यात्रा पिपलानी, भेल कॉलेज, डीआरएम ऑफिस चौराहा तक निकली। इसमें सीधी के लालबहादुर घासी और उनके दल ने घसियाबाजा नृत्य प्रस्तुत किया। इसी दल के संतोष यादव ने अहिराई नृत्य की प्रस्तुति दी। कोलार डीमार्ट से शुरू हुई यात्रा शाहपुरा और बिट्टन मार्केट होते हुए 10 नंबर मार्केट तक पहुंची। यहां खंडवा की सुश्री अनुजा जोशी ने गणगौर नृत्य और डिंडोरी के तुलेश्वर भार्वे दल ने गुदुमबाजा नृत्य से लोगों का मनोरंजन किया।
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सांस्कृतिक यात्राओं में कालाकार
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा सूरजनगर, अशोका गार्डन और कोहेफिजा क्षेत्रों से भी यात्राएं निकलीं, जिनमें बधाई, अहिराई और ढिमरायाई नृत्य की झलकियां देखने को मिलीं। पूरे भोपाल में इन सांस्कृतिक झांकियों ने लोक और जनजातीय संस्कृति का रंग बिखेर दिया। कलाकारों ने नृत्य और संगीत के माध्यम से लोगों को स्थापना दिवस समारोह में भाग लेने का निमंत्रण दिया। राजधानी का हर मार्ग ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ के उल्लास में झूम उठा।
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