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विक्रमादित्य का युग मंच पर जीवंत हो उठा: CM बोले- उनकी सुशासन और जनकल्याण की नीति आज भी प्रासंगिक

Sun, 02 Nov 2025 10:56 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 02 Nov 2025 10:56 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ के दूसरे दिन भोपाल का लाल परेड ग्राउंड सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक रंगों से जगमगा उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे विरासत और विकास का संगम बताया।

 

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The era of Vikramaditya came alive on stage: CM said – his policies of good governance and public welfare are
विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह अभ्युदय मध्यप्रदेश के दूसरे दिन राजधानी भोपाल का लाल परेड ग्राउंड वैभव, संस्कृति और सृजन के रंगों से सराबोर रहा। मंच पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य का सजीव मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को ऐतिहासिक गौरव और भारतीय संस्कृति की आत्मा से जोड़ दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने वीरता, दानशीलता, न्याय, शौर्य और सुशासन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया था। उनका शासन आज भी जनकल्याण और सुशासन का आदर्श है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के साथ विरासत के संरक्षण का मंत्र दिया है और मध्य प्रदेश इसी दिशा में कार्य कर रहा है। सम्राट विक्रमादित्य ने राष्ट्र को ऋणमुक्त किया, न्याय और समरसता की व्यवस्था दी तथा विक्रम संवत का प्रारंभ किया, जो आज भी हमारी कालगणना का आधार है। उन्होंने कहा कि इतिहास की इस कथा को भोपाल में अद्भुत मंचन के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है।


 
The era of Vikramaditya came alive on stage: CM said – his policies of good governance and public welfare are
सीएम डॉ. यादव के साथ मंत्री और अन्य अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
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150 कलाकारों ने किया इतिहास सजीव
उज्जैन की संस्था विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा प्रस्तुत इस महानाट्य का निर्देशन श्री संजीव मालवीय ने किया। नाटक में ऊंट, घोड़े, हाथी, पालकी, बग्गी और महाकाल मंदिर के भव्य सेट के साथ-साथ अत्याधुनिक ग्राफिक्स और 150 कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को सम्राट क्रमादित्य के युग में पहुंचा दिया। मंच पर विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राज्यारोहण तक की गाथा का भव्य चित्रण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि जनकल्याण के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने अपराधियों के भी गुण पहचानकर उन्हें राष्ट्र निर्माण में जोड़ा। उनके शासनकाल में सुरक्षा, समानता और न्याय की मिसाल कायम हुई। 

 
The era of Vikramaditya came alive on stage: CM said – his policies of good governance and public welfare are
कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
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हंसराज रघुवंशी के भजनों ने बांधा समा
महानाट्य के पश्चात प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी ने अपने मधुर सुरों से मंच को दिव्यता से आलोकित किया। उन्होंने मेरा भोला है भंडारी जैसे लोकप्रिय भजनों से भक्तिमय वातावरण बना दिया। श्रोताओं ने तालियों की गूंज से स्वागत किया और वातावरण शिवभक्ति के रंग में रंग गया।

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The era of Vikramaditya came alive on stage: CM said – his policies of good governance and public welfare are
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
लोकनृत्यों और शिल्प मेले ने बढ़ाया आकर्षण
दिनभर प्रदेश की लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। सीधी के कलाकारों ने अहिराई लाठी नृत्य, टीकमगढ़ के कलाकारों ने मोनिया नृत्य, खंडवा की टीम ने गणगौर नृत्य, उज्जैन की महिलाओं ने मटकी नृत्य, और सागर के दल ने बधाई नृत्य प्रस्तुत किया। सिवनी के कलाकारों ने गोंड जनजातीय गुन्नूरसाई नृत्य से समापन किया।

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विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन 
साथ ही, ‘एक जिला-एक उत्पाद’ शिल्प मेला में राज्य के विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन हुआ, जिनमें भोपाल का जूट उत्पाद, बुरहानपुर की जैविक दाल, नर्मदापुरम की अगरबत्ती, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, मंडला की गोंड पेंटिंग और महेश्वरी वस्त्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने। अभ्युदय मध्यप्रदेश का दूसरा दिन परंपरा, कला और नवाचार का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि मध्य प्रदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विकास के नए आयाम गढ़ रहा है।
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