कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता समाप्त होने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस के अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव करने जा रहे थे। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने इंदिरा गांधी की प्रतिमा के पहले सभा हुई और यहां से दोपहर एक सैकड़ा से अधिक कार्यकर्ता और नेतागण अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने निकले थे। कांग्रेस कार्यकर्ता जैसे ही प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से निकलकर सड़क पर एकत्रित हुए, आगे पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर रोक दिया। बेरिकेडिंग्स को पार कर कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता निकलने की कोशिश करने लगे तो पुलिस से झड़प भी हो गई। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ झूमाझटकी भी की, हालांकि पुलिस ने किसी को आगे नहीं बढऩे दिया।
बस में भकर बाहर छोड़ा
हबीबगंज थाना प्रभारी मनीषराज सिंह भदौरिया ने बताया कि पुलिस घेराव करने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे उग्र हो गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने बेरिकेडिंग्स फांदकर निकलने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद आधा सैकड़ा से अधिक नेता व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बस में हिरासत में लिया। शहर से बाहर लेजाकर सभी को छोड़ दिया गया है। किसी की खिलाफ फिलहाल कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है और न ही किसी की गिरफ्तारी की गई है।
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भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
हाथ उठाने के बाद खदेड़ा
बेरिकेडिंग्स से पहले पुलिस जब कार्यकर्ताओं को रोकने लगी तो एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिसकर्मी से हाथापाई पर उतर आई। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दौड़ा लिया। पुलिस के खदेडऩे पर कई कार्यकर्ता भाग गए।
राहुल गांधी और पटवरी साजिश का शिकार हुए
कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी जेपी अग्रवाल और विधायक सुरेश राजे भी शामिल हुए। सुरेश राजे ने अपने संबोधन में कहा कि संसद में राहुल गांधी और मप्र विधानसभा में जीतू पटवारी साजिश का शिकार हुए हैं। कमलनाथ की पीठ पर वार कर भाजपा ने प्रदेश की सत्ता हासिल की है। यही कारण है कि चुनावों में हार का बदला एससी-एसटी, ओबीसी और आदिवासी वर्ग से लिया जा रहा है। विधानसभा में तक आदिवासी नेताओं को बोलने नहीं दिया जाता। जब-जब पिछड़ों की आवाज उठाई जाती है तब-तब माइक बंद कर दिया जाता है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की जेलों में बंद आदिवासियों की संख्या आनुपातिक रूप से सर्वाधिक है। प्रजातंत्र की रक्षा के लिए अब आंदोलन जारी रहेंगे।