जानिए उन महिलाओं को जो अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं... लखनऊ की नई पहचान हैं... भविष्य के सुनहरे सपने बुन रही हैं... बेटी, बहन, पत्नी, मां... तमाम रिश्तों को जीते हुए भी खुद की पहचान गढ़ी है... वह सशक्त हैं, ताकतवर हैं, उनमें जूझने और जीतने का माद्दा है... एक सफल वास्तुकार की तरह समाज को अपने ढंग से संवार रही हैं, आकार दे रही हैं... परिवार और समाज की जिम्मेदारी के बीच संतुलन साधकर अपने जीवन की नायिका खुद बन चुकी हैं...
Women's Day स्पेशल: जानें, उन महिलाओं को जिन्होंने लखनऊ को दी नई पहचान
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डिम्पल यादव (सांसद)
सैन्य पृष्ठभूमि में पली-बढ़ी सांसद डिम्पल यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू हैं। कॉमर्स ग्रेजुएट डिम्पल दो बेटियों और एक बेटे की मां हैं। राजनीति में उनकी एंट्री 2009 में हुई। हालांकि फिरोजाबाद से राजबब्बर के खिलाफ वह लोकसभा चुनाव हार गई थीं। 2012 और 2014 में वह कन्नौज से सांसद चुनी गईं। डिम्पल राजनीति का सौम्य और सबसे प्रभावी चेहरा बनकर उभरी हैं। पारिवारिक कलह के बीच पति के साथ हर मोर्चे पर खड़ी नजर आईं। हाल फिलहाल वह विधानसभा चुनावों में धुआंधार प्रचार शैली के कारण चर्चा में हैं।
बेगमा हामिदा हबीबुल्लाह (पूर्व सांसद और मंत्री, समाजसेविका)
हैदराबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रहे नाजिर यार जंग बहादुर की बेटी और मेजर जनरल इनायत हबीबुल्लाह की पत्नी बेगम हामिदा महिला सशक्तीकरण का जीता-जागता उदाहरण हैं। जीवन के सौवें वसंत में भी उनकी जिंदादिली हर किसी को अपना कायल बना लेती है। सांसद और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुकीं बेगम ‘सेवा चिकनकारी’ की प्रमुख हैं। इन सबसे बढ़कर वह प्रगतिशील भारतीय मुस्लिम महिला का एक प्रभावी चेहरा हैं। उनका जीवन भारतीय महिलाओं खासकर अल्पसंख्यक महिला समुदाय को अपने तरीके से जीवन जीने और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देता है।
श्रुति सडोलिकर काटकर
(कुलपति, भातखंडे संगीत सम विश्वविद्यालय)
जयपुर अतरौली घराने की शास्त्रीय गायिका श्रुति खयाल स्टाइल में गाती हैं। संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित श्रुति कोल्हापुर के एक प्रसिद्ध परिवार में जन्मीं है। श्रुति ने संगीत की शिक्षा घर में ही पिता पं. वामनराव सडोलिकर से ग्रहण की। इसके बाद गुलुभाई जसदनवाला और अजीज्जुद्दीन खान से संगीत की शिक्षा ली। ठुमरी, टप्पा, नाट्य संगीत जैसी अन्य विधाओं में गाने वाली श्रुति भारत के अलावा कनाडा, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी समेत तमाम देशों में मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। साथ ही विश्व के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का भी उन्हें मौका मिला।
डॉ. मंदाकिनी प्रधान
(मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, एसजीपीजीआई)
‘पापा के मुंह से एक दिन सुना था कि एक अच्छा डॉक्टर ही देश की सच्ची सेवा कर सकता है। बस ठान लिया कि डॉक्टर ही बनना है।’ ओडिशा से एमबीबीएस किया, चंडीगढ़ पीजीआई से एमडी और फिर मेडिकल जेनेटिक्स में डीएम किया। डॉ. प्रधान ने ही पहली बार एसजीपीजीआई में फीटस में ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू किया। विश्व के सबसे छोटे भ्रूण में ब्लड ट्रांसफ्यूजन का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम है। हाल ही में भ्रूण के सीने में भरे पानी को शंट डालकर निकालने की अपनी तरह की देश की पहली बेहद जटिल सर्जरी कर सुरक्षित प्रसव कराने के कारण चर्चा में रहीं।