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यूपीएससी टॉपर्सः किताबों से कम, ऑनलाइन से की ज्यादा तैयारी
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 02 Jun 2017 03:25 PM IST
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सिविल सेवा
- फोटो : amar ujala
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यूपीएससी की अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा-2016 में होनहारों ने कामयाबी हासिल कर एक बार फिर लखनऊ का मान बढ़ाया है। सिविल सेवा की परीक्षा के बुधवार को जारी नतीजों में सर्वज्ञ मिश्रा, विवेक रंजन मैत्रेयऔर मयंक मिश्रा ने अच्छी रैंक हासिल कर लखनऊ को गौरवान्वित महसूस करने का मौका दिया। ऐसे ही कामयाब सितारों से अमर उजाला ने बात कर जाने उनके सफलता के राज...
विवेक रंजन मैत्रेय
- फोटो : amar ujala
सिलेबस पर फोकस कर मिली सफलता
विवेक रंजन मैत्रेय, 164वीं रैंक
सिविल सेवा में पहले मौके में ही सफलता पाने वाले विवेक रंजन मैत्रेय का 2015 में भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ और वह असिस्टेंट कमिश्नर की ट्रेनिंग कर रहे हैं। यह दूसरा अटेंम्प्ट था, जिसमें बेहतर रैंक मिली। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने वाले विवेक ने ग्रेजुएशन के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। सिलेबस को पूरी तरह से कवर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सिलेब्स बड़ा होने के कारण इसे याद रखना और फिर परीक्षा में लिखना बहुत महत्वपूर्ण था। मैंने पढ़ने के साथ दोहराने पर पूरा ध्यान दिया, जिसका फायदा मिला। विवेक के पिता नागेश रंजन मैत्रेय सचिवालय में सेक्शन ऑफीसर और मां रेखा देवी शिक्षिका हैं। उन्होंने कहा कि मां-पिता ने पढ़ाई में कभी कोई दिक्कत नहीं आने दी। मेरी सफलता का पूरा श्रेय उन्हीं को है।
टिप्स : स्नातक से ही लक्ष्य बनाकर तैयारी शुरू कर दें, मोटीवेशन रखें।
विवेक रंजन मैत्रेय, 164वीं रैंक
सिविल सेवा में पहले मौके में ही सफलता पाने वाले विवेक रंजन मैत्रेय का 2015 में भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ और वह असिस्टेंट कमिश्नर की ट्रेनिंग कर रहे हैं। यह दूसरा अटेंम्प्ट था, जिसमें बेहतर रैंक मिली। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने वाले विवेक ने ग्रेजुएशन के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। सिलेबस को पूरी तरह से कवर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सिलेब्स बड़ा होने के कारण इसे याद रखना और फिर परीक्षा में लिखना बहुत महत्वपूर्ण था। मैंने पढ़ने के साथ दोहराने पर पूरा ध्यान दिया, जिसका फायदा मिला। विवेक के पिता नागेश रंजन मैत्रेय सचिवालय में सेक्शन ऑफीसर और मां रेखा देवी शिक्षिका हैं। उन्होंने कहा कि मां-पिता ने पढ़ाई में कभी कोई दिक्कत नहीं आने दी। मेरी सफलता का पूरा श्रेय उन्हीं को है।
टिप्स : स्नातक से ही लक्ष्य बनाकर तैयारी शुरू कर दें, मोटीवेशन रखें।
सर्वज्ञ मिश्रा
- फोटो : amar ujala
विकसित भारत के लिए देंगे अपना योगदान
सर्वज्ञ मिश्रा, 159वीं रैंक
भारत विकासशील देश से अब विकसित देश की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए हर क्षेत्र में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं और तेजी से बदलाव हो रहा है। टेक्नोलॉजी भी बदल रही है। देश को विकसित बनाने में अपना योगदान देने के लिए सर्वज्ञ मिश्रा ने सिविल सेवा के क्षेत्र में आने की सोची। बीबीडी से बीटेक किया और चार साल दिल्ली की आईटी कंपनी में नौकरी की। इसके बाद 2013 में पारिवारिक काम से लखनऊ लौटे और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पहले मौके में पीसीएस में चयन हुआ और सेल्स टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर बन गए। आईएएस का यह तीसरा प्रयास था। मैंने किताबें कम ली और करेंट अफेयर्स की पढ़ाई ऑनलाइन ही की। शाम को ही पढ़ाई का समय मिलता था।
सर्वज्ञ के पिता स्व. वीरभद्र मिश्रा, लखनऊ विवि में संस्कृत के प्रोफेसर थे और मां अनीता मिश्रा गृहिणी हैं। 2015 में बहन संस्कृता मिश्रा भी पीसीएस बनी। उन्होंने कहा कि मैंने भाई सुविज्ञ मिश्रा के साथ तैयारी की। घर परिवार के लोगों के सहयोग से ही सफलता मिली। उन्होंने बताया कि बचपन से ही घर में संस्कृत का माहौल है। मैंने साहित्य पढ़ रखा था और व्याकरण पिता जी ने तैयार कराया था। इसलिए आईएएस में संस्कृत विषय लिया। इसकी तरफ रुझान कम हो रहा है। मेरा इससे भावनात्मक लगाव है। तैयारी में राइटिंग स्किल और वाक्य बनाने की आदत होनी चाहिए।
टिप्स : किताबी पढ़ाई से अलग करेंट अफेयर्स और लिखने की क्षमता विकसित करें।
सर्वज्ञ मिश्रा, 159वीं रैंक
भारत विकासशील देश से अब विकसित देश की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए हर क्षेत्र में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं और तेजी से बदलाव हो रहा है। टेक्नोलॉजी भी बदल रही है। देश को विकसित बनाने में अपना योगदान देने के लिए सर्वज्ञ मिश्रा ने सिविल सेवा के क्षेत्र में आने की सोची। बीबीडी से बीटेक किया और चार साल दिल्ली की आईटी कंपनी में नौकरी की। इसके बाद 2013 में पारिवारिक काम से लखनऊ लौटे और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पहले मौके में पीसीएस में चयन हुआ और सेल्स टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर बन गए। आईएएस का यह तीसरा प्रयास था। मैंने किताबें कम ली और करेंट अफेयर्स की पढ़ाई ऑनलाइन ही की। शाम को ही पढ़ाई का समय मिलता था।
सर्वज्ञ के पिता स्व. वीरभद्र मिश्रा, लखनऊ विवि में संस्कृत के प्रोफेसर थे और मां अनीता मिश्रा गृहिणी हैं। 2015 में बहन संस्कृता मिश्रा भी पीसीएस बनी। उन्होंने कहा कि मैंने भाई सुविज्ञ मिश्रा के साथ तैयारी की। घर परिवार के लोगों के सहयोग से ही सफलता मिली। उन्होंने बताया कि बचपन से ही घर में संस्कृत का माहौल है। मैंने साहित्य पढ़ रखा था और व्याकरण पिता जी ने तैयार कराया था। इसलिए आईएएस में संस्कृत विषय लिया। इसकी तरफ रुझान कम हो रहा है। मेरा इससे भावनात्मक लगाव है। तैयारी में राइटिंग स्किल और वाक्य बनाने की आदत होनी चाहिए।
टिप्स : किताबी पढ़ाई से अलग करेंट अफेयर्स और लिखने की क्षमता विकसित करें।
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मयंक मिश्रा
- फोटो : amar ujala
पढ़ाई में घंटे नहीं, सोर्स मायने रखते हैं
मयंक मिश्रा, 379वीं रैंक
सिविल सेवा में दूसरे प्रयास में सफलता पाने वाले मयंक मिश्रा कहते हैं कि पढ़ाई में घंटे नहीं मायने रखते हैं। मायने रखता है पढ़ाई का तरीका और उसका सोर्स। उन्होंने कहा कि मैंने कभी पढ़ाई के घंटे नहीं फिक्स किए, लेकिन जब भी पढ़ता था तो संबंधित चैप्टर को पूरा करके ही उठता था। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो मैंने राइटिंग पर पूरा फोकस किया था। एमएनएनआईटी से पीजी करने के बाद मयंक ने पहले इलाहाबाद फिर लखनऊ में आईएएस की तैयारी की और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा और देश के लिए कुछ करने के इरादे से इस सेवा को चुना। इसमें आम लोगों से सीधा संवाद करने का मौका मिलता है और बेहतर कॅरिअर भी है। मयंक के पिता राजेश मिश्रा डॉक्टर और मां रेवा मिश्रा शिक्षिका हैं। परिवार के पूरा सहयोग से सफलता मिली।
टिप्स : लक्ष्य तय कर उसे फॉलो करें और नियमित पढ़ाई करें।
मयंक मिश्रा, 379वीं रैंक
सिविल सेवा में दूसरे प्रयास में सफलता पाने वाले मयंक मिश्रा कहते हैं कि पढ़ाई में घंटे नहीं मायने रखते हैं। मायने रखता है पढ़ाई का तरीका और उसका सोर्स। उन्होंने कहा कि मैंने कभी पढ़ाई के घंटे नहीं फिक्स किए, लेकिन जब भी पढ़ता था तो संबंधित चैप्टर को पूरा करके ही उठता था। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो मैंने राइटिंग पर पूरा फोकस किया था। एमएनएनआईटी से पीजी करने के बाद मयंक ने पहले इलाहाबाद फिर लखनऊ में आईएएस की तैयारी की और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा और देश के लिए कुछ करने के इरादे से इस सेवा को चुना। इसमें आम लोगों से सीधा संवाद करने का मौका मिलता है और बेहतर कॅरिअर भी है। मयंक के पिता राजेश मिश्रा डॉक्टर और मां रेवा मिश्रा शिक्षिका हैं। परिवार के पूरा सहयोग से सफलता मिली।
टिप्स : लक्ष्य तय कर उसे फॉलो करें और नियमित पढ़ाई करें।