गंदगी, टूटे कांच, महंगे टिकट, महंगी कैटरिंग। यही शताब्दी की पहचान बनती जा रही है। यही वजह है कि शताब्दी के यात्री देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की ओर शिफ्ट होने शुरू हो गए हैं। अक्तूबर 2019 में तेजस का संचालन आईआरसीटीसी ने शुरू किया था। ट्रेन सुबह छह बजे लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के लिए रवाना होती है।
Indian Railways: शताब्दी की विफलता पर टिकी तेजस की सफलता, ट्रेनों के निजीकरण में अहम रोल अदा करेगी
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अब शताब्दी में कैटरिंग चालू हुई तो रेट 275 व 385 रुपये रखे गए। इससे शताब्दी का टिकट महंगा होकर तेजस के आसपास पहुंच गया। ऐसे में यात्री शताब्दी से कटकर तेजस की ओर मुड़ने लगे हैं।
शताब्दी से बेहतर है तेजस
पैसेंजर तृप्ति भारती ने बताया कि शताब्दी का टिकट सस्ता होने की वजह से यात्री पसंद करते थे। लेकिन अब इसका टिकट तेजस के बराबर पहुंच गया है। तेजस की पंक्चुएलिटी अच्छी है और लेट होने पर रिफंड भी दिया जाता है। ऐसे में शताब्दी में पैसेंजर क्यों सफर करेगा। खानपान व सेवासत्कार के लिहाज से भी तेजस शताब्दी से बेहतर साबित हो रही है।
यह है अंतर
श्रेणी - तेजस - शताब्दी
टाइम - 6.15 घंटे - 6.45 घंटे
कैटरिंग - नि:शुल्क - 385 रुपये
जीएसटी - 111 रुपये - 100 रुपये
सुपरफास्ट चार्ज - 00- 75 रुपये
रिजर्वेशन चार्ज - 00 - 60 रुपये
टिकट दर - 2,321 रुपये - 2,480 रुपये
(नोट: टिकट दर एग्जीक्यूटिव क्लास की है तथा सोमवार का है।)