{"_id":"575976e04f1c1b6e409c5ae1","slug":"super-30-teacher-anand-kumar-talks-about-his-coaching-and-student","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जानिए, सुपर-30 के आनंद कुमार से पढ़े आईआईटियंस क्यों हैं लाजवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानिए, सुपर-30 के आनंद कुमार से पढ़े आईआईटियंस क्यों हैं लाजवाब
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 09 Jun 2016 07:44 PM IST
विज्ञापन
लखनऊ अमर उजाला में आनंद कुमार
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसा नहीं कि बहुत गरीब प्रतिभाएं ही दम तोड़ती हैं, लोअर मिडिल क्लास की गरीबी भी बहुत दुखदाई होती है। मिसाल के तौर पर आईआईटी की फीस बहुत बढ़ गई है, बीपीएल बच्चों के लिए तो फीस माफ है और अपर क्लास के लिए फीस की व्यवस्था हो जाएगी लेकिन मिडिल क्लास इसमें सबसे ज्यादा पिसेगा। ये बात सुपर-30 के संचालक आनंद कुमार ने लखनऊ अमर उजाला.कॉम से खास बातचीत के दौरान कही।
लखनऊ अमर उजाला में आनंद कुमार
- फोटो : amar ujala
माता-पिता अपनी जमीन का आखिरी टुकड़ा बेचकर भी अपने बच्चे को पढ़ाते हैं। वहीं कुछ प्रतिभाएं साधन न जुट पाने के चलते आगे नहीं बढ़ पातीं, ऐसी ही प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया है पटना के आनंद कुमार ने।
लखनऊ अमर उजाला में आनंद कुमार
- फोटो : amar ujala
आनंद बताते हैं कि वह खुद भी बेहद गरीब परिवार से हैं। उनका कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सेलेक्शन हो गया लेकिन उसी वक्त पिताजी का निधन हो जाने के चलते वह वहां की फीस नहीं भर पाए। उनके पास पिताजी की जगह नौकरी करने का विकल्प था लेकिन पैसों के अभाव में पढ़ाई पूरी न कर पाने की घटना ने उनका जीवन बदल दिया। इस घटना से प्रेरणा लेकर उन्होंने गरीब बच्चों की मदद करने का जिम्मा उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
आनंद कुमार बच्चों को देंगे फ्री में कोचिंग
- फोटो : amar ujala
आनंद ने 1992 में पांच सौ रुपये में किराए का कमरा लेकर रामानुजन स्कूल के साथ मिलकर मैथ पढ़ाना शुरू किया। एक साल में इंस्टीट्यूट 2 से 36 बच्चे और उसके बाद 500 बच्चे हो गए। आनंद ने 2002 में सुपर-30 की स्थापना की। इसमें हर साल आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को चुना जाता है। 2002 से लेकर अब तक सुपर-30 के 350 स्टूडेंट्स का आईआईटी में सेलेक्शन हो चुका है।
विज्ञापन
लखनऊ अमर उजाला में आनंद कुमार
- फोटो : amar ujala
आनंद ने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष देखा और आज पहचान बनाने के बाद भी वह जमीन से जुड़े दिखाई देते हैं। यही शिक्षा उन्होंने अपने स्टूडेंट्स को भी दी है। उन्होंने बताया कि कोचिंग के लिए आने वाले बच्चे उनके घर पर परिवार के सदस्यों की तरह रहते हैं। वे उनकी मां के साथ खाना बनाते, साथ में खाते और घर के कामों में भी हाथ बंटाते हैं।