यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का औपचारिक एलान हो गया है। जिसके बाद प्रदेश में भाजपा की चुनौतियां बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में संयुक्त प्रेस वार्ता कर गठबंधन का एलान कर दिया।
यह पहली बार होगा जब सपा-बसपा गठबंधन कर लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ेंगे। हालांकि, वर्ष 1993-94 में बसपा ने पहली बार किसी राजनीतिक दल से गठबंधन किया था तो वह सपा ही थी। 25 साल पहले अयोध्या का विवादित ढांचा गिरने के बाद भाजपा की हवा रोकने के लिए सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो कांशीराम ने गठबंधन किया था। तब जगह-जगह यह नारे लगे थे, ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम।’
नतीजों से भाजपा तो नहीं उड़ी, लेकिन ढांचा ढहने और मंदिर के नाम पर सत्ता की कुर्बानी का संदेश देने के बावजूद पिछड़ी और दलित जातियों की गोलबंदी से हार गई। (तस्वीर में तत्कालीन बसपा सुप्रीमो कांशीराम व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव)
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सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव
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1993 में बसपा का गठन हुए तब नौ वर्ष ही हुए थे। सपा तो नई-नई बनी थी। मुलायम सिंह यादव ने चंद्रशेखर से नाता तोड़कर समाजवादी पार्टी का गठन किया था। सपा ने 264 सीटों पर चुनाव लड़ा था और बसपा ने 164 सीटों पर। सपा को 109 सीटों पर जीत मिली जबकि बसपा को 67 पर। भाजपा को अकेले 177 सीटों पर जीत मिली थी।
भाजपा की सीटों की संख्या सपा और बसपा को मिली सीटों से भी ज्यादा थी, पर चुनाव पूर्व गठबंधन के नाते तत्कालीन राज्यपाल ने गठबंधन के नेता मुलायम सिंह यादव को बुलाकर शपथ दिलाई। कांग्रेस ने इस गठबंधन का समर्थन किया। एक साल होते-होते महत्वाकांक्षाओं की टकराहट सार्वजनिक होने लगी और 2 जून 1995 को स्टेट गेस्ट हाउस कांड ने दोनों का गठबंधन तोड़ दिया।
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प्रेस कांफ्रेंस में बसपा सुप्रीमो मायावती का स्वागत करते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
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अब जब करीब ढ़ाई दशक बाद एक बार फिर दोनों पार्टियों में गठबंधन हो रहा है तब बसपा की कमान मायावती व सपा की कमान अखिलेश यादव के हाथ में है। मायावती ने गठबंधन का एलान करते हुए कहा कि सपा व बसपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी जबकि कांग्रेस के लिए गठबंधन न होते हुए भी अमेठी व रायबरेली की सीट छोड़ दी गई है। दो सीटें अन्य दलों को दी जाएंगी।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कांफ्रेस में भाजपा व कांग्रेस दोनों को निशाने पर रखा। वहीं, अखिलेश ने दोनों पार्टियों के लिए बराबर सीटें देने के लिए मायावती का आभार जताया।