ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
ये लखनऊ में हो क्या रहा था। तस्वीर देखकर चकरा गए ना आप? दरअसल ऐसा कुछ नहीं है जैसा कि आप सोच रहे हैं।
ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
आईटी कॉलेज में आयोजित एनुअल फेस्ट ‘औरा’ के दूसरे दिन तरह-तरह की प्रतियोगिताएं हुईं। इन प्रतियोगिताओं में मनोरंजन के साथ सरप्राइजिंग एलीमेंट का भी ख्याल रखा गया। यह सभी दृश्य यहां पर हुए नाटक मंचन के हैं। इन दृश्यों में ऑनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध को कुछ इस तरह से पेश किया गया।
ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
कार्यक्रम में विद्यांत हिंदू पीजी कॉलेज के शकेब, सौम्या, पूजा के ग्रुप ने देशभक्ति तो एमिटी यूनिवर्सिटी से शिवांगी, तनुश्री, प्रिंस के समूह ने फ्यूजन की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत पाश्चात्य एकल गायन से हुई।
ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
इसमें आईटी कॉलेज की सईदा ने ‘व्रेकिंग बॉल’ गीत सुनाकर समां बांधा तो अन्य प्रतिभागियों ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘मृत्युदंड प्रतिबंधित होना चाहिए या नहीं?’ विषय पर हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित हुई जिसमें आईटी कॉलेज को पहला पुरस्कार मिला।
ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
इसके अलावा अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की राशिदा ने ‘गुलाल में रंग नहीं जिंदगी है...’ कविता सुनाई तो आईआईएलएम की प्रीति ने ‘मैंने देखा है गुलाल लोगों की मुस्कुराहटों से गिरते...’ कविता से सभी का दिल जीता। एलयू के विशाल ने ‘गुलाल तेरी लाली से खेलते भीड़ को देखा है...’ कविता सुनाई।