राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'
‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले। सांसद बनने के बाद पहली बार आप इधर तो आए। अच्छा होगा अपने पिताजी की तरह आप भी मैप बना लो। वे मैप बनाकर क्षेत्र में घूमते थे। जिस गांव में न जा पाते, उस पर टिक लगा लेते। दोबारा वहां जरूर जाते। आपको याद हो या न याद हो। बचपन में आप और प्रियंका बिटिया भी हाथी पर बैठकर इस इलाके में घूमे हो’।
राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'
पूरे ठकुराइनपुरवा के पास नजरगांव के रहने वाले रिटायर्ड स्कूल टीचर शब्बीर हुसैन ने जब राहुल गांधी से ये बातें कहीं तो वे मुस्करा दिए। राहुल का काफिला आगे बढ़ा और मास्टर शब्बीर पास खड़े लोगों को बताने लगे कि अब राहुल बेटा पर राजीव भैया का कुछ-कुछ असर आ रहा है। काफी बदले हुए हैं। मोदी सरकार से दो-दो हाथ करने की तैयारी के साथ आए हैं। देखना...बहुत जल्द मोदी सरकार के खिलाफ पूरे देश में माहौल बना देंगे।
राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'
पूरे ठकुराइन पुरवा से कुछ आगे मिर्जागढ़ में एक मकान के सामने पड़े तख्त पर राहुल बैठ गए। गांव की महिलाओं व पुरुषों ने उन्हें घेर लिया। विमला बोली, पहली बार भैया तुमका इतना नजदीक से देखेन। राहुल ने माइक संभाला। बोले, ज्यादा बरसात और ओलों से इस इलाके में बहुत नुकसान हुआ है। केंद्र व प्रदेश सरकार कोई मदद नहीं कर रही है। फिर मुद्दे पर आए। माइक गड़बड़ करने लगा तो भी आक्रामक अंदाज में मोदी पर ताबड़तोड़ हमला बोला।
राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'
बताया कि कांग्रेस सरकार आपके इलाके में इंडोगल्फ के पास फूड पार्क बनवाने जा रही थी। बन जाता तो किसानों को बिचौलियों के हाथों शोषण का शिकार न होना पड़ता, पर मोदी सरकार ने उसे रद्द कर दिया। यह सरकार किसानों और गरीबों की दुश्मन है। फूड पार्क की योजना को मोदी ने मेरे प्रति बदले की भावना से रद्द किया है। वे मुझे चोट पहुंचाते तो कोई बात नहीं थी, पर उन्होंने किसानों को चोट पहुंचाई है। इसका बदला लिया जाएगा।
राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'
चुन-चुन कर हमले: लगा कि दो महीने के अज्ञातवास के बाद राजनीति में दोबारा सक्रिय हुए राहुल-टू और राहुल-वन में भले ही बहुत फर्क न आया हो लेकिन कुछ न कुछ जरूर आया है। बात दीगर है कि अमेठी के लोगों के सवालों और यहां के सरोकारों की कसौटी पर खुद को कसने के लिए अभी राहुल को बहुत कुछ करना पड़ सकता है। पर, छह महीने बाद राहुल को देखने व सुनने वालों की मानें तो राहुल-वन गुमसुम और खोए-खोए से रहते थे, पर राहुल-टू बोलना और हमला करना सीख गए हैं।