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बाबरी विध्वंस: अतीत भूलकर भविष्य की ओर देख रही अयोध्या, बरसी पर इकबाल अंसारी समेत इन लोगों ने कही ये बातें

Sat, 05 Dec 2020 02:07 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 05 Dec 2020 02:07 PM IST
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People speak on anniversary of babri Masjid demolition in Ayodhya
सुरेश दास और इकबाल - फोटो : अमर उजाला
बाबरी विध्वंस की बरसी छह दिसंबर को इस बार अयोध्या में नई सुबह होगी। मुस्लिम अट्ठाइस साल से चली आ रही तल्खी, गम और गुस्सा भूलकर न काला झंडा लगाएंगे न यौम-ए-गम का आयोजन करेंगे। वे दुकान-कारोबार को भी आम दिनों की तरह संचालित करते नजर आएंगे। उधर, विश्व हिंदू परिषद समेत संत-धर्माचार्यों ने भी विजय और शौर्य दिवस की परंपरा को खारिज कर दिया है। सबका एक ही संदेश है कि अब राजा राम की अयोध्या आपसी सद्भाव का केंद्र बनेगी, न किसी से कोई बैर होगा न संताप। त्रेतायुग जैसी अयोध्या सजाने में जन-जन शिद्दत से कदम ताल करेगा। छह दिसंबर 1992 जेहन में आते ही कभी अयोध्या समेत समूचा विश्व अनहोनी की आशंका से कांप उठता था। इसी दिन बेकाबू लाखों कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी ढांचा ढहा दिया था। रक्तपात में आस-पास के मुहल्लों में डेढ़ दर्जन लोगों की जाने गईं और लाखों की संपत्तियां राख हो गईं। प्रतिक्रिया में विश्वभर में मंदिरों-मस्जिदों पर हमले और भीषण दंगे हुए। तभी से यह तिथि दो समुदायों के बीच तल्खी का स्याह इतिहास बन गई थी। मुस्लिम समुदाय घरों-कारोबार, इबादतस्थलों आदि पर काला झंडा लगाकर यौम-ए-गम का इजहार करता था। इस दिन वह न अपनी दुकानें खोलता था, न कारोबार करने को घर से निकलता था। पूरे दिन गम और गुस्से के इजहार में कार्यक्रम होते थे और यह सिलसिला देश भर में चलता था। जबकि विश्व हिंदू परिषद समेत हिंदू संगठनों की ओर से विजय व शौर्य दिवस मनाने के कार्यक्रम होते थे। लेकिन, इस बार माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। सरयू अपनी रौ में बह रही हैं, और दोनों समुदाय के लोग एक साथ घूमते-फिरते और चाय पीते हंसी-ठिठोली करते दिख रहे हैं। सरयू घाट से हनुमानगढ़ी, रामलला, कनक भवन, टेढ़ी बाजार मस्जिद, कटरा आदि का इलाका सामान्य है, न फोर्स की खास आमद दरफ्त दिख रही है, न कहीं रोक-टोक व बंदिश।

 
People speak on anniversary of babri Masjid demolition in Ayodhya
इकबाल अंसारी - फोटो : अमर उजाला
श्रीरामजन्मस्थान होने के निर्णय के बाद यौम-ए-गम कैसा : इकबाल
यौम-ए-गम का प्रमुख केंद्र मुद्दई मरहूम हासिम अंसारी के घर पर सब सामान्य है। उनके इंतकाल के बाद बेटे इकबाल अंसारी ने बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। वे कहते हैं कि अंतिम दौर तक सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद की न्याय की लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले के बाद ही उन्होंने छह दिसंबर पर यौम-ए-गम से परहेज किया। कोर्ट ने मस्जिद की जगह को श्रीरामजन्मस्थान होने का निर्णय दे दिया है, तो अब यौम-ए-गम कैसा। अब मुसलमान भाइयों को इसका सम्मान करने के साथ आपसी सद्भाव के लिए आगे आने की जरूरत है। वे कहते हैं कि अब्बू हासिम अंसारी ने तो हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के बाद से ही यौम-ए-गम को खत्म कर दिया था। हां, यहां आने वाले मेहमान व मीडिया से जरूर बात होती रहती है, वही इस बार भी होगा। 
 
People speak on anniversary of babri Masjid demolition in Ayodhya
हाजी महबूब - फोटो : अमर उजाला
मारे गए लोगों के लिए होगी कुरानख्वानी व फातिहा : हाजी महबूब
बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे हाजी महबूब के घर पर ही छह दिसंबर को लेकर यौम-ए-गम के इजहार का तबसे कार्यक्रम होता रहा है। यहां लखनऊ, दिल्ली, अलीगढ़ समेत कई बड़े शहरों से मौलाना-इकराम, नेता-अधिवक्ता छह दिसंबर 1992 की घटना पर जबरदस्त विरोध दर्ज कराते थे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा जाता था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी हाजी यौम-ए-गम पर अड़े थे, लेकिन इस बार वे शांत व मुतमईन दिखे। हाजी महबूब ने कहा-अब कोई गम नहीं मनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाबरी मस्जिद की शहादत के लिए यौम-ए-गम मनाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। वे बोले, जब मैं नहीं मनाऊंगा तो देश व दुनिया में कौन मनाएगा। सिर्फ यहां बाहरी भीड़ की हिंसा में मारे गए लोगों के लिए टेढ़ीबाजार मस्जिद में कुरानख्वानी होगी और उसके बाद फातिहा पढ़ा जाएगा। इस दौरान बाबरी मस्जिद का कोई जिक्र नहीं होगा। 

 
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People speak on anniversary of babri Masjid demolition in Ayodhya
पार्षद हाजी असद - फोटो : अमर उजाला
अब नई अयोध्या में रोजगार व विकास की चाहत : पार्षद
श्रीरामजन्मभूमि समेत उससे सटे आधा दर्जन मोहल्लो के वार्ड के पार्षद हाजी असद कहते हैं कि अब कहीं भी काला झंडा नहीं लगेगा न कोई अपनी दुकान-कारोबार ही बंद रखेगा। सभी लोग शांति-सद्भाव से नई अयोध्या की तरक्की का सपना सच होते देखना चाहते हैं, ताकि यहां के युवाओं को शिक्षा व रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। छह दिसबंर की घटना के बाद यहां 17 लोग मारे गए थे, सिर्फ उनके शोक में कुरानख्वानी व फातिहा होगा। 
 
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People speak on anniversary of babri Masjid demolition in Ayodhya
महंत कमलनयन - फोटो : अमर उजाला
राममंदिर के साथ बन रहा राष्ट्रमंदिर : कमलनयन 
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही गुरुमहराज जी ने शौर्य व विजय दिवस न मनाने की अपील की थी। रामनगरी अब छह दिसंबर को भूल चुकी है। अयोध्या में सिर्फ राममंदिर ही नहीं बन रहा, बल्कि राष्ट्रमंदिर का भी निर्माण हो रहा है। अयोध्या पहले भी सद्भाव का संदेश देती रही है, और आगे भी अयोध्या से यह संदेश पूरे विश्व में प्रसारित होता रहेगा। छह दिसंबर को गम या शौर्य मनाने की अब कोई जरूरत ही नहीं है।

 
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