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PCS: मेधावियों ने अफसर बन बढ़ाया लखनऊ का मान, शेयर किए अपने सक्सेज मंत्रा, तस्वीरें
Sat, 12 Sep 2020 05:37 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 12 Sep 2020 05:37 PM IST
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ज्योति, डॉ श्रुति पांडेय
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पीसीएस परीक्षा-2018 का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। परीक्षा में लखनऊ के मेधावियों ने अपने हुनर का करिश्मा दिखाया तथा मेरिट में जगह बनाई। पुलिस कांस्टेबल की बेटी ज्योति शर्मा ने परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया तो दिव्या, श्रुति, आकांक्षा, अजेंद्र, आशुतोष तिवारी, अंकित सिंह और प्रशांत सिंह के साथ ही काफी परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की। पीसीएस अभ्यर्थी काफी समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। पीसीएस-2018 के इंटरव्यू हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। अब जाकर परिणाम घोषित किया गया है। ‘अमर उजाला’ ने मेधावियों से बात करके उनकी सफलता की कहानी जानने का प्रयास किया। पेश है रिपोर्ट :
ज्योति शर्मा
- फोटो : amar ujala
ज्योति ने हासिल की तीसरी रैंक
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2018 की परीक्षा में तीसरा स्थान ज्योति शर्मा ने राजधानी का नाम रोशन किया है। मूल रूप से मथुरा निवासी ज्योति इस समय अयोध्या के मिल्खीपुर ब्लॉक में बीडीओ के पद पर हैं। उनके पिता देवेंद्र शर्मा पुलिस विभाग में हैं और लखनऊ में तैनात हैं, मां उमा शर्मा गृहिणी हैं। ज्योति का परिवार लखनऊ में ही रह रहा है और उन्होंने यहीं से परीक्षा की तैयारी भी की है। ज्योति ने बताया कि पिछली बार पीसीएस परीक्षा-2017 का रिजल्ट 11 अक्तूबर को आया था। बीडीओ पद पर नाम आने से थोड़ी निराशा हुई थी। 18 अक्तूबर को पीसीएस-2018 का इंटरव्यू था, इसलिए काफी अपसेट थी, पर इंटरव्यू अच्छा हो गया। अगला लक्ष्य आईएएस बनना है। जूनियर्स को ज्योति शर्मा सलाह देती हैं कि सिविल सेवा में तैयारी के लिए कड़ी मेहनत के साथ लगन भी जरूरी है। किसी की आलोचना को सकारात्मक रूप में लें तथा उन्हें गलत साबित करने का प्रयास करें। ज्योति की छोटी बहन कीर्ति शर्मा ओएनजीसी में वैज्ञानिक और भाई दीपक शर्मा वॉलीबाल का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2018 की परीक्षा में तीसरा स्थान ज्योति शर्मा ने राजधानी का नाम रोशन किया है। मूल रूप से मथुरा निवासी ज्योति इस समय अयोध्या के मिल्खीपुर ब्लॉक में बीडीओ के पद पर हैं। उनके पिता देवेंद्र शर्मा पुलिस विभाग में हैं और लखनऊ में तैनात हैं, मां उमा शर्मा गृहिणी हैं। ज्योति का परिवार लखनऊ में ही रह रहा है और उन्होंने यहीं से परीक्षा की तैयारी भी की है। ज्योति ने बताया कि पिछली बार पीसीएस परीक्षा-2017 का रिजल्ट 11 अक्तूबर को आया था। बीडीओ पद पर नाम आने से थोड़ी निराशा हुई थी। 18 अक्तूबर को पीसीएस-2018 का इंटरव्यू था, इसलिए काफी अपसेट थी, पर इंटरव्यू अच्छा हो गया। अगला लक्ष्य आईएएस बनना है। जूनियर्स को ज्योति शर्मा सलाह देती हैं कि सिविल सेवा में तैयारी के लिए कड़ी मेहनत के साथ लगन भी जरूरी है। किसी की आलोचना को सकारात्मक रूप में लें तथा उन्हें गलत साबित करने का प्रयास करें। ज्योति की छोटी बहन कीर्ति शर्मा ओएनजीसी में वैज्ञानिक और भाई दीपक शर्मा वॉलीबाल का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी है।
दिव्या त्रिपाठी
- फोटो : amar ujala
सच्चे मन से प्रयास दिलाता है सफलता
मेरे भाई रितेश त्रिपाठी का चयन डीएसपी 2017 में हुआ है और बहन प्रज्ञा त्रिपाठी का चयन 2017 में डिस्ट्रिक एंप्लॉयमेंट ऑफिसर के पद पर हुआ है। मेरे पिता स्व. मोहनचंद्र त्रिपाठी का सपना था कि हम सभी प्रशासनिक सेवा में जाएं। आज रिजल्ट घोषित हुआ तो उनका यह सपना सच हो गया। मेरा यह पहला प्रयास था। मैंने इंजीनियरिंग की है उसके बाद मैं सैमसंग में कार्यरत रही। काम करते हुए ही मेरा चयन एसएससी सीजीएल के पद पर हुआ। उसके बाद से मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। मेरा मानना है कि सच्चे मन से अगर प्रयास किया जाए तो फिर सफलता जरूर हाथ लगती है। - दिव्या त्रिपाठी, डिस्ट्रिक्ट इंप्लायमेंट ऑफिसर
मेरे भाई रितेश त्रिपाठी का चयन डीएसपी 2017 में हुआ है और बहन प्रज्ञा त्रिपाठी का चयन 2017 में डिस्ट्रिक एंप्लॉयमेंट ऑफिसर के पद पर हुआ है। मेरे पिता स्व. मोहनचंद्र त्रिपाठी का सपना था कि हम सभी प्रशासनिक सेवा में जाएं। आज रिजल्ट घोषित हुआ तो उनका यह सपना सच हो गया। मेरा यह पहला प्रयास था। मैंने इंजीनियरिंग की है उसके बाद मैं सैमसंग में कार्यरत रही। काम करते हुए ही मेरा चयन एसएससी सीजीएल के पद पर हुआ। उसके बाद से मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। मेरा मानना है कि सच्चे मन से अगर प्रयास किया जाए तो फिर सफलता जरूर हाथ लगती है। - दिव्या त्रिपाठी, डिस्ट्रिक्ट इंप्लायमेंट ऑफिसर
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डॉ श्रुति पांडेय
- फोटो : amar ujala
नियमित पढ़ाई और रिवीजन जरूरी
पीसीएस की पिछली परीक्षा में मेरा चयन सीटीओ के पद पर हुआ था। इस बार मैंने दोबारा मेहनत की और मुझे असिस्टेंट कमिश्नर टैक्स का पद मिला है। मेरे पिता पारस नाथ पांडेय पासपोर्ट ऑफिस में कार्यरत हैं। सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है कि हिम्मत न हारी जाए। लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए यह जरूरी है कि नियमित पढ़ाई करें तथा उसको लगातार रिवाइज भी करते रहें। परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए मैं अपने परिवार तथा सबसे ज्यादा अपने पापा को श्रेय देना चाहूंगी। - डॉ. श्रुति पांडेय, असिस्टेंट कमिश्रर टैक्स
पीसीएस की पिछली परीक्षा में मेरा चयन सीटीओ के पद पर हुआ था। इस बार मैंने दोबारा मेहनत की और मुझे असिस्टेंट कमिश्नर टैक्स का पद मिला है। मेरे पिता पारस नाथ पांडेय पासपोर्ट ऑफिस में कार्यरत हैं। सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है कि हिम्मत न हारी जाए। लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए यह जरूरी है कि नियमित पढ़ाई करें तथा उसको लगातार रिवाइज भी करते रहें। परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए मैं अपने परिवार तथा सबसे ज्यादा अपने पापा को श्रेय देना चाहूंगी। - डॉ. श्रुति पांडेय, असिस्टेंट कमिश्रर टैक्स
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आकांक्षा सिंह
- फोटो : amar ujala
सच्ची लगन से मिलती है जीत
मेरी मां सावित्री सिंह भारतीय किसान यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पिता जय किशोर पीएससी में कार्यरत हैं। घर पर मां को किसानों के लिए दिन रात काम करते देख मेरे अंदर भी यह जज्बा है कि मैं भी किसानों और पिछड़ों के लिए कुछ कर पाऊं। एसडीएम के पद पर तैनात होकर मैं उनके लिए काफी कुछ कर सकती हूं। मैंने आईटी कॉलेज से स्नातक और लखनऊ विद्यालय से भूगोल में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की है। सच्ची लगन से मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता है। - आकांक्षा सिंह, एसडीएम 28वी रैंक
मेरी मां सावित्री सिंह भारतीय किसान यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पिता जय किशोर पीएससी में कार्यरत हैं। घर पर मां को किसानों के लिए दिन रात काम करते देख मेरे अंदर भी यह जज्बा है कि मैं भी किसानों और पिछड़ों के लिए कुछ कर पाऊं। एसडीएम के पद पर तैनात होकर मैं उनके लिए काफी कुछ कर सकती हूं। मैंने आईटी कॉलेज से स्नातक और लखनऊ विद्यालय से भूगोल में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की है। सच्ची लगन से मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता है। - आकांक्षा सिंह, एसडीएम 28वी रैंक