मिस दिवा यूनिवर्स बोलीं- क्राउन के लिए 24 घंटे में 48 घंटे की मेहनत करने को तैयार हूं, तस्वीरें
वर्तिका कहती हैं कि एक भारतीय के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक व पारिवारिक मूल्य काफी मायने रखते हैं। मैं खुद संस्कार व मूल्यों के बीच पली-बढ़ी भारतीय लड़की हूं। वैश्विक मंच पर जब मैं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता मेें एक सशक्त प्रतिभागी के रूप में मौजूद रहूंगी, उस वक्त परंपरा और मूल्यों में गुंथी सोच से विश्व का परिचय कराऊंगी।
वर्तिका कहती हैं कि मेरी पढ़ाई हेल्थ सेक्टर में हुई है। पहले एक एनजीओ के साथ काम करती थी। अब मैंने प्योर ह्यूमेन्स नाम की संस्था बनाई है। सोशल मीडिया के जरिए मुझे इससे विश्व के युवाओं को जोड़ना है और कुछ बड़ा करना है। जीत को लेकर आश्वस्त हूं, इसलिए कह सकती हूं कि मुझे यूनिवर्स प्रतियोगिता का खिताब जीतने के बाद उससे जुड़ी जिम्ेमदारियां पूरी करनी होंगी।
ताज किसका होगा यह मंच पर आपकी किस्मत तय करती है
हमारे देश में प्रतिभावान लड़कियों की कमी नहीं। यहां से ऐसी प्रतिभागियों को ही भेजा जाता है, जिनमें संभावनाएं भरी होती हैं। पर कौन जीतेगा, ताज किसे मिलेगा और किसका सितारा चमकेगा यह उसी वक्त आपकी किस्मत तय करती है। मैं खुशनसीब हूं कि मेरी किस्मत में यह दिन आया और सबका प्यार मिला।
मेरा लखनऊ बदल गया, पर नहीं बदली घरवाली फीलिंग
जब मैं 2015 में यहां से गई थी तो यहां बहुत सी चीजें नहीं थी। कई सारे क्लब हो गए हैं। मेट्रो आ गई है। साथ ही लोगों का माइंड सेट बदल गया है। यह हर ब्रांड है और लोगों की लाइफ स्टाइल का हिस्सा हैं। अब लोग फैशन की परिभाषा समझते हैं और उससे जुड़े लोगों को स्वीकार करने लगें हैं, लेकिन एक चीज नहीं बदली यहां के अपनेपन का अहसास। आज भी जब आती हूं तो घरवाली फीलिंग आती है। दुनिया में कहीं भी रहूं लेकिन अपना शहर, अपना घर घर ही रहेगा।