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कांटों भरी है लखनऊ-इलाहाबाद एक्सप्रेस को दौड़ाने की राह, टाइम व रूट पर हो रही माथापच्ची

Mon, 22 Jul 2019 03:54 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 22 Jul 2019 03:54 PM IST
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many problems in running of lucknow-allahabad shatabdi express
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी एक्सप्रेस को पटरी पर लाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों ने माथापच्ची तेज कर दी है, लेकिन यह आसान नहीं है। टाइमिंग, किराए, रूट से लेकर फ्लेक्सी प्राइसिंग आदि से रेलवे अधिकारियों को जूझना पड़ रहा है। इससे शताब्दी की राह कांटों भरी नजर आती है। दरअसल, लखनऊ से इलाहाबाद के लिए एक हाई स्पीड व लग्जरी ट्रेन चलाने की मांग कुंभ से पहले उठ रही थी। इस पर कई बैठकें भी हुईं, लेकिन ट्रेन चलाने पर सहमति नहीं बन सकी थी। हालांकि, अब संचालन के लिए रास्ते साफ हो रहे हैं। दोनों शहरों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित और लगातार टल रही शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन साल के अंत तक शुरू हो सकता है।

many problems in running of lucknow-allahabad shatabdi express
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

इस बाबत उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। प्रशासन का दावा है कि लखनऊ से इलाहाबाद के बीच शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन दिसंबर तक शुरू हो जाएगा। दरअसल, रूट पर डबलिंग व इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा होते ही ट्रेन को पटरी पर लाने की तैयारी है। इलाहाबाद से ऊंचाहार और रायबरेली से लखनऊ के बीच रेलमार्ग का विद्युतीकरण हो चुका है। जबकि ऊंचाहार से रायबरेली के बीच विद्युतीकरण का काम जल्द पूरा करने का लक्ष्य है। रायबरेली से लखनऊ तक रेलवे लाइन की डबलिंग हो चुकी है और इलाहाबाद से फाफामऊ की डबलिंग भी जल्द से जल्द पूरी कर ली जाएगी।

many problems in running of lucknow-allahabad shatabdi express
प्रतीकात्मक तस्वीर

...कहीं जनशताब्दी जैसा न हो हाल
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि लखनऊ-इलाहाबाद रूट पर पहले जनशताब्दी एक्सप्रेस चलती थी। इस ट्रेन में आरक्षण की व्यवस्था थी। यात्री एसी सेकेंड क्लास आदि में रिजर्वेशन कराकर सफर करते थे। लेकिन एक स्थिति ऐसी आई, जब रेलवे के सामने खर्च निकालने का संकट पैदा हो गया। इससे बाद में ट्रेन को इंटरसिटी बना दिया गया।

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डेमो - फोटो : डेमो

फ्लेक्सी प्राइसिंग से लगेगा अड़ंगा
दरअसल, रेलवे बोर्ड के नियमानुसार शताब्दी व राजधानी ट्रेनों में विमान की तर्ज पर फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम लागू होता है। इसके तहत यदि लखनऊ-प्रयागराज शताब्दी एक्सप्रेस चलती है तो फ्लेक्सी प्राइसिंग से किराया बढ़ना तय है। मसलन, हर 10 प्रतिशत सीटों की बिक्री के बाद किराया 10 प्रतिशत बढ़ जाएगा। अभी लखनऊ से इलाहाबाद के बीच जनरल का किराया 45 से 80 रुपये, स्लीपर का 160 रुपये, चेयरकार का 330 रुपये, थर्ड एसी का 495 रुपये, सेकेंड एसी का 700 और फर्स्ट एसी का 1,155 रुपये है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

टाइम व रूट पर हो रही माथापच्ची
लखनऊ से इलाहाबाद के लिए अभी प्रयाग इंटरसिटी, गंगा गोमती एक्सप्रेस, त्रिवेणी एक्सप्रेस, इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस सहित दो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। ऐसे में शताब्दी के लिए रेलवे को ऐसी टाइमिंग रखनी होगी, जिसमें उसे यात्री मिल सके। वहीं लखनऊ से इलाहाबाद जाने के दो रूट हैं। पहला वाया रायबरेली, ऊंचाहार, कुंडा होते हुए, जबकि दूसरा रूट वाया प्रतापगढ़ है। हालांकि, रेलवे की प्राथमिकताओं में वाया रायबरेली रेलखंड शामिल है। अभी 200 किमी की दूरी तय करने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, जबकि शताब्दी से तीन घंटे में सफर पूरा हो सकेगा।

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