नेपाल में पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बरसात के बाद प्रदेश के कई जिलों में नदियां उफान पर हैं। जहां बाढ़ का पानी कम हुआ है उन जिलों में लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। श्रावस्ती और बलरामपुर में राप्ती अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। यहां तेज बरसात से विशंभरपुर में कच्ची दीवार गिरने से उसके नीचे दब कर एक व्यक्ति की मौत हो गई। इसके चलते कई गांव अब टापू बन चुके हैं।
यूपी: पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश से प्रदेश के कई जिलों में नदियां उफान पर, ग्रामीणों में दहशत, तस्वीरें
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बलिया: गंगा में समाए 15 मकान
आजमगढ़/बलिया। घाघरा का जलस्तर घटने और बढ़ने का क्रम जारी है। इसके साथ नदी कटान भी कर रही है। कुल 12 घरों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। उधर, बलिया में गंगा के जलस्तर में खास वृद्घि नहीं देखी गई। उदय छपरा में 15 मकानों के साथ ही कोली माता का मंदिर गंगा की जलधारा में विलीन हो गया।
मेरठ: गंगा की लहरों से कटान तेज
मेरठ। आठ साल बाद गंगा ने गांव फतेहपुर और डाबर को फिर से अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। गंगा की धारा में दो झोपड़ी बह भी गई हैं। कटान रोकने के लिए किया जा रहा कार्य भी गंगा की तेज लहरों के सामने टिक नहीं पा रहा है। गांव के प्राथमिक विद्यालय के भी गंगा की चपेट में आने की आशंका है। प्रशासन ने भी गांव वालों से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कह दिया है। प्रशासन स्टड बनवाकर गांव को बचाने के प्रयास में जुटा है।
प्रयागराज: कछार में अब आफतों का डेरा
प्रयागराज। गंगा-यमुना शनिवार की सुबह खतरे के निशान से नीचे आ गईं। लेकिन, मुसीबतें और बढ़ गई हैं। अब कछार की गलियों से घरों तक गंदगी और कीचड़ का अंबार लग गया है। दुर्गंध फैलने से सांस लेना दूभर हो गया है। बड़े हिस्से में बिजली न होने से रातें अंधेरे में कट रही हैं।
बलरामपुर के पावर हाउस परिसर रेहरा बाजार में भरा पानी।