केजीएमयू में एक तरफ कोरोना पॉजीटिव मरीज भर्ती हैं तो दूूसरी तरफ ट्रामा सेंटर में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। शोध को बढ़ावा संग शैक्षिक विकास को भी गति देनी है। ऐसे में यहां व्यवस्था से जुड़े चिकित्सा विशेषज्ञों की दिनचर्या बदल गई है। मरीजों के इलाज में लगे चिकित्सकों के लिए ग्लव्स से लेकर पीपीईटी किट, मरीजों की दवाओं की उपलब्धता, भविष्य में मरीजों के बढ़ने पर आने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनाने में इनका सुबह से शाम तक का वक्त निकल जाता है। मरीजों के इलाज में लगी टीम का हौसला बढ़ाने, क्वारंटीन में गए कर्मचारी और डॉक्टर दोबारा ड्यूटी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें, इसके लिए भी यह टीम लगातार पसीना बहा रही है। टीम के सदस्यों में कौन, क्या कर रहा, इसकी पड़ताल करती रिपोर्ट।
ये कोरोना फाइटर्स घर के बुजुर्गों की तरह रख रहे चिकित्सा टीम का ख्याल, मरीजों के लिए हर समय हैं तैनात
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मरीजों का हाल जानने के बाद जाते घर
केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एमएलबी भट्ट सुबह ऑफिस पहुंचते ही मरीजों का ब्यौरा लेते हैं। किसकी सेहत में सुधार, किसकी हालत बिगड़ी, इसकी जानकारी के बाद इलाज में लगी मुख्य टीम के साथ आगे की रणनीति बनाते हैं। इसके बाद परिसर में चल रही तैयारियों की जानकारी लेकर अगले दिन की कार्ययोजना पर चर्चा करते हैं। सीएमएस व एमएस सहित अन्य विभागाध्यक्षों के साथ मंत्रणा कर संसाधनों के विकास की रणनीति बनाते हैं। शोध व शैक्षिक विकास की रणनीति बनाने में देर शाम हो जाती है। शाम को मरीजों की स्थिति जानने के बाद परिसर छोड़ते हैं।
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आरके गर्ग विश्वविद्यालय के रिसर्च डीन हैं। कोरोना के नियंत्रण के लिए देश- दुनिया में अपनाई जा रही रणनीति व उसके नतीजों, शोध की विधाओं पर इनकी नजर रहती है। अब इन्हें लॉजिस्टिक कमेटी की भी जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में यहां आने वाली हर सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता जांचने का भी जिम्मा है। क्योंकि ग्लव्स की गुणवत्ता खराब होने पर पूरी टीम की जान जोखिम में पड़ सकती है।
ओपीडी के प्रभारी डॉ. नितिन भारद्वाज भी उपकरणों की खरीद व उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यहां आने वाले वेंडर और उनके सामान की गुणवत्ता देखते हैं। जरूरत के हिसाब से यूनिवर्सिटी में किट, सैनिटाइजर व अन्य सामान की उपलब्धता तय करते हैं।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र आतम अहम भूमिका में हैं। कोरोना मरीजों के इलाज में इस विभाग की भूमिका फ्रंट फाइटर की है। ऐसे में समन्वय के साथ सभी डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इलाज में बरती जाने वाली सावधानी पर लगातार अपडेट देते रहते हैं।