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मां का परदा ही होता था जो हमारी गरीबी ढकता था: मुनव्वर राना
Wed, 10 Feb 2016 01:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:11 PM IST
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मां का परदा ही होता था जो हमारी गरीबी ढकता था: मुनव्वर राना
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शायद वे इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था... तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा, मां की मौत पर बोले मुनव्वर राना।
मां का परदा ही होता था जो हमारी गरीबी ढकता था: मुनव्वर राना
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प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना की मां नहीं रही। वह मां, जिस पर लिखी शायरी ने राना को दुनियाभर में लोकप्रिय बना दिया। मां पर लिखी शायरी की किताब की 10 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
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मंगलवार को 84 वर्ष की अवस्था में उनका निधन हो गया। उनका नाम आयशा खातून था और वह पिछले काफी समय से बीमार थीं। पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था। मुनव्वर ने भर्राए गले से कहा... शायद वे इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था... तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा।
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मां का परदा ही होता था जो हमारी गरीबी ढकता था: मुनव्वर राना
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मंगलवार को पीजीआई में जगह न होने पर उनकी सहारा हॉस्पिटल में डायलिसिस की जा रही थी। राना बताते हैं कि मैंने मां पर बहुत लिखा लेकिन मां ने मुझे कभी नहीं सुना था। एक बार मेरे पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम बना तो मेरे दोस्त महमूद गोरी ने कहा कि हम एक अलग ढंग का मुशायरा करना चाहते हैं, जिसमें आप मां पर शायरी सुनाएंगे और इस मुशायरे की अध्यक्षता आपकी मां करेंगी।
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मां ने मुझे डेढ़ घंटे तक सुना लेकिन परदे में। मैंने भी रचनाएं पढ़ते हुए एक बार भी उसकी ओर नहीं देखा क्योंकि मुझे मालूम था कि अगर एक बार भी उधर नजर की तो आंखें भर आएंगी। राना कहते हैं कि परदे में रहने की उनकी आदत थी।
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