गठिया (आर्थराइटिस) की समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे बड़ी वजह है खानपान में बदलाव से वजन बढ़ना और शारीरिक श्रम की कमी। पौष्टिक आहार, भरपूर विटामिन सी व डी युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने और सूर्य नमस्कार, प्राणायाम के साथ नियमित दवाएं लेते रहने से बीमारी से राहत मिलती है। इसके लिए जरूरी है कि वजन पर नियंत्रण रखेे। आराम तलबी और मादक पदार्थों से दूरी बनाएं। कुछ लोगों में यह अनुवांशिक कारणों से भी होती है। इसपर पड़ताल करती एक रिपोर्ट :
गठिया से घबराएं नहीं, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान, इन खाद्य पदार्थों का करें सेवन
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गठिया की जांच बेहद जरूरी
गठिया एक तरह से 40 बीमारियों का समूह है। यह कुष्ठ और ऑटो इम्यूनल बीमारियों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इसकी जांच बेहद जरूरी होती है। हड्डियों में कैल्शियम व जरूरी खनिज पदार्थ कम होने से हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इस रोग में प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म की विकृति होती है। यूरिक एसिड की वृद्धि भी एक वजह है। यह हाथ, पैर, अंगुली सहित शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है। ब्लड संबंधी जांच और एक्स-रे के जरिए बीमारी पकड़ में आ जाती है। इस बीमारी में जोड़ों में जकड़न, जोड़ों से आवाज आना, हाथ, पैर या अंगुलियां टेढ़ी होना, पालथी मारकर बैठने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे में विटामिन डी वाली सब्जियों एवं फलों का नियमित और भरपूर प्रयोग करना चाहिेए। पुराने जौ, गेहूं आदि का प्रयोग करना चाहिए। डेयरी उत्पादों, संतरे का रस, दूध और अनाज आदि विटामिन डी की कमी को पूरा करते हैं। गठिया और इससे जुड़ी ऑटो इम्यूनल डिजीज की जांच सुविधा केजीएमयू में उपलब्ध है। अब कम उम्र के लोगों में भी यह बीमारी होने लगी है। घुटने की आर्थराइटिस से पीड़ित लगभग 30 प्रतिशत रोगी 45 से 50 साल की उम्र वाले हैं। जबकि 18 से 20 प्रतिशत रोगी 35 से 45 साल के हैं।
- प्रो. अनुपम वाखलू, विभागाध्यक्ष, गठिया रोग विभाग
गठिया के मरीजों का शरीर अकड़ जता है। इससे ज्यादातर लोग शारीरिक श्रम कम कर देते हैं। नतीजा गठिया रोगियों का वजन तेजी से बढ़ता है। यह समस्या को बढ़ाने लगता है। इसी तरह रक्तचाप बढ़ने, मधुमेह, हार्ट अटैक, अस्थमा, कोलेस्ट्राल और बांझपन सहित करीब 53 तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन लेना चाहिए। जैसे ही जोड़ों में दर्द शुरू हो, तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। पहले इसकेलक्षण जोड़ों में दिखते हैं। ध्यान नहीं देने पर धीरे-धीरे घुटना, कूल्हा खराब हो जाता है। हालांकि घुटना रक्षित तकनीक से लंबे समय तक घुटने के दर्द से बचा जा सकता है। घुटना अधिक खराब होने पर घुटना रक्षित शल्य (नी प्रिजर्वेटिव सर्जरी) के जरिए 10 से 15 वर्ष के लिए घुटना प्रत्यारोपण से बचा जा सकता है। - डॉ. आनंद स्वरूप, पूर्व प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
वजन पर नियंत्रण जरूरी
अब तो युवा और बच्चे भी इसके मरीज हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह है वजन पर नियंत्रण नहीं होना। मिलावटी तेल से बनी चीजें खाने, लंबे समय तक बैठे रहने की वजह से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। जोड़ों में जलन, दर्द, सूजन, लालपन, जोड़ों का गर्म होना, चलने में दर्द होना शुरू हो तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। यह कई प्रकार का होता है। इमैटिकवाइड आर्थराइटिस, एनकाइनोंसिंग गाऊटी, सोरियाटिक आदि। लेकिन आस्टियोआर्थराइटिस ज्यादातर लोगों को अपनी चपेट में लेता है। इसमें घुटना प्रभावित होता है। इसे शुरुआत में दवाओं के जरिए रोका जा सकता है, लेकिन इसका अंतिम विकल्प जोड़ प्रत्यारोपण होता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज पुरानी दिनचर्या में लौट आते हैं। - डॉ. नरेंद्र कुशवाहा, केजीएमयू
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान :
- दर्द के साथ जोड़ वाले स्थान पर सूजन और लाल चकत्ते भी दिखाई देते हैं।
- सोकर उठने पर शरीर में अकड़न और सामान्य होने में कुछ देर लगे।
- हड्डियों के जोड़ों में दर्द, तनाव, जलन हो तो जांच कराएं। यूरिक एसिड बढ़ा हो तो समझ लें कि गठिया के लक्षण आ रहे हैं।
- अचानक जोड़ों में दर्द के साथ शारीरिक कमजोरी महसूस हो और आंखों के नीचे झुर्रियां पड़ें, कीचड़ आने लाले, सांस लेने में दिक्कत हो, वजन घटे और भूख कम लगे।
- मेनोपॉज के आसपास वाली महिलाओं को ज्यादा सावधान होने की जरूरत है। महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण, पोषण की कमी, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम नहीं करने की वजह से भी गठिया के लक्षण आने लगते हैं।