लखनऊ का माल एवेन्यू स्थित बंगला नंबर 13... यहां की एक आवाज प्रदेश की सियासत में हलचल मचा देती थी, राजनीति का मिजाज बदल देती थी, किसी को कुर्सी दिला देती थी तो किसी की खिसका देती थी। इसे एक बार अंदर से निहारने के लिए बड़े-बड़े अफसर, मंत्री और नेता लालायित रहते थे। पर, इस बंगले की आज न पहले जैसी बात है और न धाक। यहां जिन प्रतिमाओं पर हर दिन-हर घड़ी बेशकीमती फूलों की मालाएं सजी रहती थीं, अब वहां मुरझाए फूल दिख रहे हैं। धूल की मोटी परतों ने बंगले को बदरंग करना शुरू कर दिया।
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मायावती
- फोटो : अमर उजाला
यह बात उस बंगले की है, जिसे कभी बसपा सुप्रीमो मायावती ने सजाया-संवारा था। यह मानकर कि यह बंगला जीवनभर उनका आशियाना रहेगा, मगर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने सब कुछ बदल दिया। मायावती को यह सरकारी बंगला 4 जून 2018 को खाली करना पड़ा।
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मायवती
- फोटो : अमर उजाला
मायावती बंगला छोड़कर क्या गईं कि यहां की रौनक ही चली गई। अब यह वीरान और सुनसान है। सात महीने पहले तक यह बंगला शाही सौंदर्य का प्रतीक था। आज उसकी रंगत फीकी पड़ गई है, वह बेनूर हो रहा है।
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बंगला नं.-13
- फोटो : अमर उजाला
बंगले में कर्मचारियों के लिए बने कमरे और अतिथिगृह बंद पड़े है। हालांकि साफ-सफाई के लिए यहां चार-पांच कर्मचारी नियुक्त हैं, पर बंगले की जरूरत के सामने में यह संख्या बेहद कम है। कभी इस बंगले पर परिंदा भी बिना इजाजत पर नहीं मार सकता था, आज यहां सुरक्षा की जिम्मेदारी होमगार्ड के कुछ जवानों पर है।
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मायावती
- फोटो : अमर उजाला
मालाएं बदलने का इंतजार करते थक गईं प्रतिमाएं
बंगले में लगीं मायावती व कांशीराम की विशाल प्रतिमाएं धूल खा रही हैं। पहले इन्हें हर दिन चमकाया जाता था। महीनों पहले चढ़ाई गईं मालाएं बदलने का इंतजार करते-करते थक गईं। फूल भी सूखकर गिरने लगे हैं। उसे भी अब वहां से हटाने वाला कोई नहीं है।