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लखनऊः सराफा कारीगरों का संकट, रोजाना सात करोड़ का कारोबार प्रभावित

Thu, 25 Jun 2020 04:35 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 25 Jun 2020 04:35 PM IST
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covid 19 effect on jewellery business
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कोविड-19 के चलते सराफा बाजार पर छाया संकट टलने का नाम नहीं ले रहा है। अनलॉक से सराफा की दुकानें तो खुल गई हैं, लेकिन कारीगरों की कमी के चलते कारोबार पटरी पर नहीं लौट पा रहा है। लॉकडाउन में घर गए कारीगरों के काम पर न लौटने से रोजाना सात करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि कारीगर आने को तैयार नहीं हैं। यदि यही हाल रहा तो स्टाक तैयार करवाना मुश्किल हो जाएगा। 

 
covid 19 effect on jewellery business
रवि केसरवानी - फोटो : amar ujala
बाहर से भी नहीं मंगवा पा रहे गहने 
सराफा कारोबारी रवि केसरवानी कहते हैं कि दिल्ली, मेरठ भी सराफा कारोबार का बड़ा हब है, लेकिन वहां भी कारीगरों की समस्या है। हम वहां से भी माल नहीं ले पा रहे हैं। बंगाल के कारीगरों का जेवर निर्माण में एकाधिकार है, लेकिन वे सभी घर लौट चुके हैं। गर्मियों की सहालग देहाती सहालग मानी जाती है, लेकिन माल न होने से सराफा कारोबारी खाली हाथ रह गए हैं। अब अगला सीजन देवोत्थानी एकादशी से आएगा, लेकिन स्टाक तब तक के लिए कैसे तैयार होगा, यह एक बड़ी समस्या है। सर्राफ विनोद महेश्वरी कहते हैं कि हर कारोबारी के यहां स्टाक सीमित होता है। कब तक रखा हुआ माल चलेगा। एक अंगूठी भी दस हाथों से होकर गुजरती है, ऐसे में बड़े जेवर बनना तो नामुमकिन है।
 
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रामकुमार वर्मा - फोटो : amar ujala
ग्राहक को डिजाइन देना मुश्किल 
आलमबाग सराफा बाजार के चेयरमैन रामकुमार वर्मा कहते हैं कि आलमबाग में दो कारखाने हैं। एक लॉकडाउन के साथ ही बंद हो गया था। एक खुला है, लेकिन कारीगर न होने से काम प्रभावित हो रहा है। बाजार में 57 छोटे-बड़े सराफा प्रतिष्ठान हैं और सभी बचे स्टाक से काम चला रहे हैं। ग्राहक अपनी पसंद की डिजाइन चाहता है, उसके लिए कारीगर की जरूरत पड़ती है। कोई भाभी तो कोई मां के गहने देकर शादी में शगुन पूरे कर रहा है। भूतनाथ मार्केट में 75 के करीब सराफ की दुकानें हैं, कारीगरों की कमी का संकट सभी पर है। कारोबारी सरस जैन कहते हैं कि कुछ कारीगर परेशान हैं, उनके पास काम नहीं है, वे आना चाहते हैं, लेकिन संक्रमण से कुछ वे डरे हैं कुछ हम भी। 
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रवि नारायण - फोटो : amar ujala
वापस काम पर लौटने से डर रहे कारीगर 
चौक सराफा कारोबारी रवि नारायण अग्रवाल कहते हैं कि 90 फीसदी कारीगर बंगाल के हैं। वहां के हुगली और वर्धमान जिले के तो कुछ ओडिसा व महाराष्ट्र कारीगरों के भरोसे ही जेवर निर्माण का काम है। इनमें लगभग सभी जा चुके हैं। हमने उनसे बात की तो बताया, काम की जरूरत तो है, लेकिन आना मुश्किल है, क्योंकि परिवार संक्रमण से डरा हुआ है। कारीगर अब घर पर रहकर खेती करके पेट भरने का मन बना रहे हैं। 
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आदिश जैन - फोटो : amar ujala
सराफा दुकानें तो खुलीं, लेकिन कारखाने बंद
चौक सराफा सबसे बड़ा होलसेल मार्केट है, जहां से माल सभी जगह जाता है। लखनऊ सराफा के महामंत्री व उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के महामंत्री आदिश जैन के मुताबिक रोजाना की सात करोड़ रुपये का कारोबार होता है। कारीगरों की कमी के चलते पूरी तरह से बंद है। चौक में 300 के करीब सराफा की दुकानें और 500 के करीब कारखाने हैं। दुकानें तो सब खुल चुकी हैं, लेकिन कारखाने सिर्फ 5 फीसदी ही खुले हैं। कारखानों के मालिक तो हैं, लेकिन इनके पास भी कारीगर न होने से जो काम 5 दिन में हो सकता है वो भी 10 से 15 दिन में हो रहा है। 
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