अखिलेश बोले, 'अगर मांगने वाला अच्छा है तो मुख्यमंत्री पद भी दे दूंगा'
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‘घर’ में छिड़ी महाभारत पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शुक्रवार को खुलकर बोले। अमर सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने साफ कहा- ‘मैंने और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने आज सुबह ही तय किया है कि हम दोनों के बीच कोई ‘बाहरी’ नहीं होगा। इस बात को चाचा भी मांनेंगे। जो भी ‘बाहरी’ बीच में आएगा, उसे बाहर कर देंगे।’
अमर सिंह के साथ तल्खी किस हद तक पहुंच गई है, इसे उन्होंने यह कहकर जाहिर किया कि अब वे ‘बाहरी’ को अंकल नहीं कहेंगे। उन्होंने कहा कि नेताजी की खुशी के लिए वह कुछ भी करेंगे। अखिलेश ने कहा कि मांगने वाला अच्छा हो तो वह मुख्यमंत्री पद भी देने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने जो खोया उसकी कहीं कोई बात नहीं हो रही है।
चाचा शिवपाल के साथ किसी तरह का विवाद न होने का दावा करते हुए कहा कि झगड़े की जड़ वह कुर्सी है, जिस पर वह बैठे हैं। अखिलेश एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे तो परिवार के झगड़े से लेकर तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
दो मंत्रियों की बर्खास्तगी, मुख्य सचिव बदलने तथा शिवपाल से अहम विभाग छीनने जैसे ताजा घटनाक्रम पर अखिलेश ने जिस तरह से अपना पक्ष रखा, उसका लब्बोलुआब यही था कि सब कुछ ‘बाहरी’ का किया-कराया है और अब पिता-पुत्र ने तय किया है कि इस ‘बाहरी’ को बाहर ही रखेंगे।
...तो मुख्यमंत्री पद भी दे दूंगा
शिवपाल के विभाग वापस करने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि मांगने वाला अच्छा हो तो मुख्यमंत्री पद भी दे दूंगा। सब कुछ वापस कर दूंगा, मंत्री भी बना दूंगा, विभाग भी लौटा दूंगा। इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करके निर्णय लूंगा, लेकिन हमने जो खोया उसकी बात कोई नहीं कर रहा है। मुझसे भी अध्यक्ष पद छीना गया है। उनके पदों और उनकी वापसी बात हो रही। मैं सब वापस कर दूंगा, पर चुनाव में टिकट का रास्ता मेरे जरिये निकले, क्योंकि पार्टी की परीक्षा है तो मेरी भी परीक्षा है। कम से कम मुझे टिकट बांटने का अधिकार मिले। मैं नेताजी से भी मांग करूंगा कि टिकट बांटने में मेरी भी बात मानी जाए।
जिस कुर्सी पर बैठा हूं, झगड़ा उसकी वजह से
अखिलेश ने कहा कि सपा में झगड़ा मेरी वजह से नहीं बल्कि मैं जिस कुर्सी पर बैठा हूं, उसकी वजह से है। नेताजी जो फैसला करेंगे उसे हम मानेंगे। वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो मेरे पिता भी हैं और चाचा के भाई भी हैं। वह कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेंगे।
चाचा हैं इसीलिए इस्तीफा स्वीकार नहीं किया
शिवपाल के इस्तीफे पर अखिलेश ने कहा कि उन्हें चाचा मानता हूं इसीलिए इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। नेताजी सारे मामले को देख रहे हैं, वही विचार करेंगे। उनका जो भी फैसला होगा, सब उसे मानेंगे।
झगड़ा नहीं है, नाराजगी हो सकती है
अखिलेश ने कहा कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है, अलबत्ता किसी की नाराजगी हो सकती है। चाचा से मेरी बात हुई है। क्या बात हुई है यह कोई जान नहीं सकेगा। अभी चाचा से आगे भी मुलाकात होगी।
मोबाइल वाट्सएप का है प्रभाव
बातचीत के बाद शिवपाल द्वारा इस्तीफा देने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, चाचा बृहस्पतिवार रात 8.30 बजे मुझसे मिलकर गए थे, लेकिन आजकल तो वाट्सएप, मोबाइल, ट्विटर का जमाना है, इसलिए कभी भी किसी से बातचीत तो हो ही सकती है। हो सकता है कि यह उसी का असर हो।
अमर सिंह नहीं तो कौन
अखिलेश बोले, बाहरी न होने पर जो सफाई दे रहे हैं, उसके मद्देनजर मैं तो आजम साहब की बात कहूंगा कि चोर की दाढ़ी में तिनका क्यों? गौरतलब है कि आजम ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सीएम ने किसी का नाम नहीं लिया तो अमर सिंह सफाई क्यों दे रहे हैं?
हां, अब उन्हें अंकल नहीं कहूंगा
सवाल हुआ कि मायावती ने बुआ कहने से मना किया है तो कुछ लोग चाहेंगे कि उन्हें अंकल भी न कहें? इस पर अखिलेश ने कहा कि आज की परिस्थितियों को देखते हुए वह उन्हें अंकल नहीं कहेंगे।
सिंघल क्यों हटे चाचा जानते हैं
मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटाने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी में एक बात अच्छी है कि जो बनाता है, उसके प्रति अधिकारी वफादार हो जाता है। सिंघल चाचा के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं।
सिंघल क्यों हटे, कैसे हटे, ये चाचा को भी मालूम है। दिल्ली की पार्टी में हो सकता है कि सिंघल ने मेरे खिलाफ न बोला हो, किसी और ने बोला हो पर मैं तो कान से देख रहा हूं, आंख से नहीं। चाचा को बताना चाहिए कि सिंघल क्यों हटे? मंत्रियों को हटाने की वजह भी नेताजी और चाचा दोनों जानते हैं।
अध्यक्ष पद से हटाया तो बुरा लगा
सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने से नाराज होकर शिवपाल के विभाग छीन लेने के सवाल पर सीएम ने कहा, कभी-कभी उम्र का भी असर होता है, इसलिए भी गलती हो जाती है। लेकिन साहस तो नौजवानों की होती है, संभवत: इसीलिए मैने साहसी निर्णय ले लिया। मुझे बुरा लगा उसका असर आपने देखा होगा। लेकिन, अब नेताजी की खुशी को देखकर ही फैसला लिया जाएगा।
मुख्तार पर नेताजी का फैसला मंजूर
बाहुबली मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के सपा में विलय पर कहा कि मुख्तार ने नेताजी से भी बात की थी और सदन में मुझसे भी मिले थे। इस बारे में नेताजी जो फैसला करेंगे वह मंजूर होगा। पहले जब विलय रुका था तो भी नेताजी की सहमति से रुका था। मैंने कह दिया था कि नेताजी का जो फैसला होगा मानेंगे।
मेट्रो बनेगी तो शिवपाल भी बैठेंगे
अगला बजट मेट्रो में बैठकर पेश करने आएंगे तो उसमें शिवपाल भी होंगे? इस सवाल पर अखिलेश ने कहा कि हां, वह भी बैंठेंगे। मंत्री और अध्यक्ष दोनों रूप में बैठ सकते हैं। लेकिन यहां तो सवाल मुख्यमंत्री का है। अगली बार भी मैं ही बजट पेश करने आऊंगा।
कौन है हमारे मुकाबले में?
हम चार साल तक काम करते रहे, किसी ने एक्सप्रेस वे जैसी सड़क बनाई हो तो बताएं, रिकार्ड वक्त में बन रही मेट्रो मिसाल बन गई। सीजी सिटी में कैंसर इंस्टीट्यूट बना रहे हैं। एचसीएल लाए। 18-20 लाख लैपटॉप बांट दिए। किसी और ने किए हों तो बताएं। समाजवादी सरकार ने काम किया। नेताजी के घोषणा पत्र को पूरा करके दिखाया। हमारी ‘अच्छे दिन’ वालों से तुलना कर लें, पत्थरों के हाथियों का जिन्होंने पार्क बनाया, उनसे कर लें। कोई आसपास भी नहीं ठहरता।
नारा लगाने वाले बाद में खिसक जाते हैं
अध्यक्ष व मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद समर्थकों द्वारा शिवपाल के घर के बाहर नारा लगाने पर कहा कि सभी जानते हैं कि जो लोग नारे लगाते हैं, उसमें अधिकांश लोग बाद में खिसक लेते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए।
जनता नाराज नहीं है, इसलिए नुकसान नहीं होगा
मुलायम द्वारा शिवपाल के जाने से पार्टी को नुकसान होने से संबंधित बयान पर कहा, मैं तो यह जानता हूं कि जब जनता नाराज नहीं है तो नुकसान क्यों होगा। जनता के लिए काम कर रहा हूं। मेरी प्राथमिकता काम है। वह करता हूं।
कानून-व्यवस्था अच्छी थी तो जेल में सीएमओ की हत्या कैसे हुई
मायावती व जनता द्वारा कानून-व्यवस्था खराब होने के आरोप पर कहा, बसपा सरकार में कानू-व्यवस्था अच्छी थी तो जेल में सीएमओ की हत्या कैसे हो गई, इंजीनियर की हत्या कैसे हो गई? आईएएस अधिकारी ने फांसी क्यों लगा ली? आरोप लगाना आसान है। अगर बसपा के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था ठीक थी तो सरकार वापस क्यों नहीं आई?
बसपा में 50 लाख का टिकट ढाई करोड़ का कैसे हो गया?
मायावती द्वारा लगाए जा रहे लूट-खसोट के आरोप पर कहा, उनको पता है कि नेता प्रतिपक्ष क्यों भाजपा में चले गए? भाजपा वालों ने उनका नेता प्रतिपक्ष भी छीन लिया। जब किसी नेता से टिकट का पैसा लिया जाएगा तो नेता वह पैसा कहां से लाएगा। स्थिति यह है कि 50 लाख का टिकट अब ढाई करोड़ का हो गया है। सबको पता है कि लूट-खसोट कहां है।
मोदी को अब उपलब्धियों पर देना होगा भाषण
2017 में मोदी अब अपने भाषण में सवाल नहीं पूछेंगे बल्कि उन्हे अब उपलब्धियों को भाषण देना पड़ेगा। मोदी का पहले वाला भाषण इस बार नहीं चलने वाला है। अब उन्हें बताना होगा कि उन्होंने क्या किया?
राहुल को उनकी भाषा में ही जवाब दिया
अखिलेश ने कहा कि राहुल मेरी बात नहीं समझे। उन्होंने मुझे अच्छा लड़का कहा था। मैने भी उन्हें वैसे ही जवाब दिया। यदि वे मुझे अच्छा नेता कहते तो मैं भी उन्हें अच्छा नेता कहता।
राहुल यूपी में घूम रहे अच्छा है। आजादी के बाद सबसे ज्यादा सत्ता में वही रहे हैं। उन्होंने गरीब किसान देखे होंगे। हमारे विकास कार्यों को भी देख रहे होंगे।
उन्होंने कहा कि मेरी साइकिल पंक्चर हो गई है। राहुल किसानों को गुमराह कर रहे हैं। साइकिल में ट्यूबलेस टायर भी होता है। गांवों में खटिया के लिए कहावत दूसरी है, जिसे वह नहीं कहना चाहते।