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Birthday Special: मुख्यमंत्री योगी ने चुनौतियों पर किया काम पर भविष्य में ये चुनौतियां लेंगी कड़ा इम्तहान

Fri, 05 Jun 2020 02:58 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 05 Jun 2020 02:58 PM IST
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Challange in front of Chief Minister Yogi Adityanath.
- फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश की जिम्मेदारी और अचानक कोरोना जैसी महामारी के प्रकोप के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित करने की कोशिश की कि संवेदनशीलता व संकल्प से बड़ी से समस्या का सामना कर समाधान निकाला जा सकता है। पर, इसका मतलब यह नहीं कि कोरोना के कारण आए सभी संकटों की कसौटी से उन्होंने पार पा लिया है। उन्हें अभी कई परीक्षाओं से गुजरना पड़ सकता है।

Challange in front of Chief Minister Yogi Adityanath.
- फोटो : amar ujala

दरअसल, शुक्रवार को मुख्यमंत्री का जन्मदिन है। गढ़वाल के यमकेश्वर के पंचुर गांव में 5 जून 1972 को जन्मे योगी अपना जन्मदिन नहीं मनाते। लेकिन, कोरोना की चुनौतियों से निपटने के लिए वे जिस तरह काम कर रहे हैं, उसको देखते यह जन्मदिन मौजूदा परिस्थितियों में कुछ कड़े व बड़े संकल्प लेने का संदेश लेकर आता दिख रहा है।

अब तक अपने कामों से उन्होंने यह साबित कर दिया कि नीयत और नीति साफ हो तो जिम्मेदारियों को कुशलतापूर्वक निभाने में कोई बाधा नहीं आ सकती। बड़ी से बड़ी चुनौती अवसर में बदल जाती है। पर, कोरोना के कारण देश के सबसे बड़े इस प्रदेश के सामने निकट भविष्य में जो चुनौतियां दस्तक देती दिख रही हैं वे भी मुख्यमंत्री के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं लगती।

Challange in front of Chief Minister Yogi Adityanath.
- फोटो : amar ujala

सीएम ने कोरोना से निपटने में अपनी क्षमता, कामों और कुछ निर्णयों से दूसरे प्रदेशों को अपने पीछे चलने को प्रेरित किया। हॉटस्पाट जैसे प्रयोगों की काफी सराहना हुई। लेकिन, पीपीई किट खरीद में गड़बड़ी और कुछ स्थानों पर भाजपा के लोगों की तरफ से ही अधिकारियों की भूमिका पर उठाए गए सवालों ने कहीं न कहीं सरकार के सामने सोचने को काफी कुछ रख दिया है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रवासी मजदूरों के कारण सरकार के सामने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बदहाली से उबारने की कठिन चुनौती आ रही है।

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Challange in front of Chief Minister Yogi Adityanath.
- फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री ने कोरोना संकट में गरीबों को राशन मुहैया कराने व आवश्यक वस्तुओं की घर पर आपूर्ति की जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाकर साबित कर दिया कि उन्हें प्रशासनिक योग भी खूब आता है। धार्मिक पीठ के मुखिया के नाते योगी के सामने पहली परीक्षा नवरात्र के रूप में आई। एक तरफ हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा पर्व और मुख्यमंत्री के नाते धार्मिक पीठ के मुखिया पर ही मंदिरों को बंद कर लॉकडाउन पालन कराने की जिम्मेदारी पर, योगी ने राजधर्म को प्राथमिकता दी।

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Challange in front of Chief Minister Yogi Adityanath.
- फोटो : amar ujala

इसी दौरान उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर स्थल पर मूर्तियों को अस्थाई मंदिर में शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी निभाकर लोककर्म को भी पूरा किया। वह कोरोना के कारण बढ़ रही चुनौतियों से निपटने और लोगों की जरूरतों को पूरा करने पर 20 अप्रैल को रोज की तरह अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे कि तभी उन्हें उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट के निधन की सूचना मिली। पर, इस मौके पर भी उन्होंने पिता की अंत्येष्टि में न जाने का फैसला लेकर पुत्र धर्म की जगह राजधर्म को तवज्जो दी।

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