केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में रविवार को लापरवाही और हंगामे ने तीन मरीजों की जान ले ली। पहली मौत इलाज नहीं मिल पाने से हुई। अल्ट्रासाउंड जांच करने वाले डॉक्टर के नहीं आने से इंतजार में ही मरीज की सांस उखड़ गई। इसके बाद गुस्साए परिवारीजनों ने बवाल शुरू किया तो रेजीडेंट डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
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डॉक्टरों की लापरवाही से गई तीन जानें
- फोटो : amar ujala
दोपहर 12.30 बजे से 3 बजे तक यानी ढाई घंटे इलाज ठप रहा। इस दौरान उपचार नहीं मिल पाने से दो और मरीजों की मौत हो गई। इस बिग ट्रॉमा के बावजूद सीनियर डॉक्टर संडे की छुट्टी मनाते रहे। आखिरकार पुलिस के समझाने के बाद ही मामला शांत हुआ।
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चारबाग लोकमानगंज के सुरेश कुमार (45) को सुबह सात बजे पेट में तेज दर्द हुआ। परिवारीजन सुरेश को सुबह आठ बजे ट्रॉमा ले गए। भाई सुनील कुमार ने बताया कि कैजुअल्टी में बैठे रेजीडेंट डॉक्टरों ने सीटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच लिखी। अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर अभी नहीं आए हैं।
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दोपहर 12 बजे तक अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। सुरेश की सांस उखड़ने लगी तो मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने ऑक्सीजन लगा दी। थोड़ी देर बाद सुरेश की मौत हो गई। परिवारीजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। बवाल बढ़ता देख रेजीडेंट डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने दोपहर 12.30 बजे खुद को नर्सिंग स्टेशन के पीछे बने कमरे में बंद कर लिया।
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सुरेश की मौत होते ही मां सुधा, पत्नी किरन और बेटे किशन, बिपिन और शुभम बदहवास हो गए। सुरेश सब्जी बेच कर पूरे परिवार का खर्च चलाते थे। किरन और मां सुधा बस यही कह रही थी कि ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर हत्यारे हैं।