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सिवई की मिठास संग ईद से बिखरेगी तीज-त्योहार की सतरंगी छटा, साथ ही शुरू होगा सहालग का दौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 05 Jun 2018 02:30 AM IST
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सिवईं की मिठास के साथ ही लखनऊ में तीज-त्योहार की सतरंगी छठा बिखरेगी। लगातार 40 दिन तक चलने वाले इन आयोजनों का आगाज ईद की मिठास से होगा। इसके बाद 18 जून से सहालग का दौर शुरू होगा तो सड़कों पर बैंड, बाजा और बारात की धूम मचेगी। इसके बाद जगन्नाथ रथयात्रा, देवशयनी एकादशी, निर्जला एकादशी के साथ ही 27 जुलाई को पूर्णिमा पर गुरु की आराधना होगी।
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15 जून को अलविदा जुमा की नमाज के बाद इबादत का पाक महीना रमजान अलविदा होगा और 16 या 17 जून को चांद के दीदार के साथ शहर की फिजा में ईद की खुशियां तारी होंगी। घरों में सिवईं की मिठास के साथ तीन-चार दिन तक जगह-जगह टर्र के मेले की रौनक बिखरेगी।
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18 से सहालग, गूंजेंगी शहनाइयां
ईद की खुशियाें के बीच ही 18 जून से सहालग का दौर शुरू हो जाएगा। अधिक मास के चलते 16 मई से थमे वैवाहिक आयोजन शुरू होंगे, जो 16 जुलाई तक चलेंगे। जून में 18, 19, 20, 21, 23, 25, 27, 29, 30 और जुलाई में 5, 6, 9, 10, 11 और 16 जुलाई को सहालग की धूम रहेगी। उसके बाद 23 जुलाई को हरिशनी एकादशी के बाद एक-दो लग्न को छोड़ सहालग पर फिर ब्रेक लगेगा।
ईद की खुशियाें के बीच ही 18 जून से सहालग का दौर शुरू हो जाएगा। अधिक मास के चलते 16 मई से थमे वैवाहिक आयोजन शुरू होंगे, जो 16 जुलाई तक चलेंगे। जून में 18, 19, 20, 21, 23, 25, 27, 29, 30 और जुलाई में 5, 6, 9, 10, 11 और 16 जुलाई को सहालग की धूम रहेगी। उसके बाद 23 जुलाई को हरिशनी एकादशी के बाद एक-दो लग्न को छोड़ सहालग पर फिर ब्रेक लगेगा।
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24 को भीमसेनी एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी 24 जून को है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर दान करना श्रेयस्कर रहेगा। सुबह से ही व्रती निर्जल व्रत रख मीठे जल से भरा घट, शर्बत भरा घड़ा, मिष्ठान्न, फल और पंखे का दान करेंगी। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की सलाह से ही दिन भर निर्जल व्रत करने से महाबली भीम को हजारों हाथियों का बल मिला था।
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी 24 जून को है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर दान करना श्रेयस्कर रहेगा। सुबह से ही व्रती निर्जल व्रत रख मीठे जल से भरा घट, शर्बत भरा घड़ा, मिष्ठान्न, फल और पंखे का दान करेंगी। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की सलाह से ही दिन भर निर्जल व्रत करने से महाबली भीम को हजारों हाथियों का बल मिला था।
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14 जुलाई को जगन्नाथ रथयात्रा
बलभद्र और सुभद्रा के साथ 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ धूमधाम से नगर भ्रमण को निकलेंगे। गली-गली गूंजते जयकारों के बीच रथारूढ़ भगवान को भक्त सुबह से देर रात तक नगर भ्रमण कराएंगे। नगर में आधे दर्जन से अधिक स्थानों से निकलने वाली रथयात्राओं में भगवान के रथ को भक्त पुरी की यात्रा की तर्ज पर नंगे पैर खींचेंगे। अमीनाबाद की मारवाड़ी गली स्थित मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा के अलावा डालीगंज स्थित माधव मंदिर, मोतीनगर के गौड़ीय मठ से परंपरागत रूप से रथयात्रा निकलेगी। यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह भंडारे लगेंगे।
बलभद्र और सुभद्रा के साथ 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ धूमधाम से नगर भ्रमण को निकलेंगे। गली-गली गूंजते जयकारों के बीच रथारूढ़ भगवान को भक्त सुबह से देर रात तक नगर भ्रमण कराएंगे। नगर में आधे दर्जन से अधिक स्थानों से निकलने वाली रथयात्राओं में भगवान के रथ को भक्त पुरी की यात्रा की तर्ज पर नंगे पैर खींचेंगे। अमीनाबाद की मारवाड़ी गली स्थित मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा के अलावा डालीगंज स्थित माधव मंदिर, मोतीनगर के गौड़ीय मठ से परंपरागत रूप से रथयात्रा निकलेगी। यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह भंडारे लगेंगे।