सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के बावजूद रामनगरी मंगलवार को अपनी रौ में दिखी। न कहीं तनाव, न भय। एसएसपी समेत पूरी पुलिस फोर्स रोड पर वाहनों समेत लोगों की जांच-पड़ताल करती दिखी, लेकिन जिनकी जांच हो रही थी उनके चेहरों पर डर के बजाय मुस्कान थी। बाबरी विध्वंस के 26वें साल में राम नगरी बदली-बदली सी है। सरयू के घाटों पर रौनक है। मंदिरों में पूजा पाठ, सरयू स्नान के साथ ही छह दिसंबर को शौर्य दिवस और यौमे गम के आयोजन होंगे, लेकिन सिर्फ रस्म अदायगी के लिए। शहर के लोगों का इनसे ज्यादा जुड़ाव अब नहीं लगता।
Exclusive: ढांचा विध्वंस के 26वें साल, तस्वीरों में देखें अब ऐसे जी रही है अयोध्या
सियासी हलचल की सुर्खियां बनने वाली अयोध्या में जोश-आवेश और विद्वेष के बजाय अब तरक्की और रोजगार की कसक है। वेदपाठी युवा हो या मुस्लिम भाई और घाट के पंडे, सबको यहां मनाई गई भव्य दिवाली नहीं भूल रही। रामजन्म पंडा कहते हैं कि योगी सरकार ने सही नब्ज पकड़ी है। मंदिर तो बनता रहेगा, पहले अयोध्या क्या थी, उसे विश्व को समझाना जरूरी है। इससे पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के साथ तरक्की आएगी। मोहम्मद सादिक कहते हैं कि युवाओं को रोजगार कैसेे मिले, इस पर कौन सोच रहा है, इसे लेकर अब चर्चा जरूरी है।
सरयू तट पर स्नान-दान का उल्लास
रामनगरी का सरयू तट प्रतिदिन की ही तरह रहा। गौ पूजन, सरयू स्नान, दान करने वालों का सुबह से तांता लगा रहा। दोपहर तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। गोंडा से आए श्रद्धालु विजय कुमार ने कहा कि उन्हें तो याद ही नहीं है कि आज छह दिसंबर की पूर्व संध्या है। पंडा ओम प्रकाश पांडेय भी कहते हैं कि अयोध्या में तनाव जैसा कुछ नहीं है।
हनुमानगढ़ी पर भक्तों की कतार
हनुमानगढ़ी में मंगलवार को हर बार की तरह हनुमान जी के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी। हनुमानगढ़ी पर लड्डू की दुकान चलाने वाले अशोक गुप्ता कहते हैं कि सुरक्षाकर्मियों की चहल कदमी और मीडिया की सक्रियता से अंदाजा हुआ कि छह दिसंबर कल है। वे कहते हैं कि यहां कोई झगड़ा झंझट नहीं है। नेता लोग वोट के कारण माहौल खराब करते हैं। खौफ तभी होता है जब हजारों पुलिस वाले लगा दिए जाएं, बैरिकेडिंग और तलाशी शुुरू हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर टीवी से चिपके रहे संत-महंत
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर हर कोई उत्सुक दिखा। अयोध्या के साधु-संत टीवी से चिपके नजर आए। रामघाट स्थित हरिधाम गोपाल मंदिर में जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि अयोध्या एक है, इसे देखने की दृष्टि अलग-अलग हैं, लेकिन अयोध्या का वास्तविक रूप विश्व पटल पर नहीं लाया गया। संत कौशलदास, संत रमेश दास, संत हरिओम दास कहते हैं कि 25 सालों का दौर भटकाव का रहा है। श्रीराम जन्मभूमि को भुलाया नहीं जा सकता लेकिन इस पर अब राजनीति नहीं हो सकती।