Yoga Tips For Knee Pain Relief: उम्र बढ़ने के साथ घुटनों के दर्द की समस्या बढ़ने लगती है। जोड़ों में दर्द का एक प्रमुख कारण बुढ़ापा है। ये समस्या उम्र के साथ अधिक बढ़ जाती है लेकिन अगर आपको 35-40 की उम्र में जोड़ों का दर्द होना शुरू होने लगे तो समस्या को अनदेखा न करें। उम्र से पहले घुटनों या जोड़ों में दर्द का एक कारण शारीरिक गतिविधियों का अधिक इस्तेमाल है। जैसे व्यायाम, खेल ज्यादा करने से घुटनों के जोड़ों पर दबाव पड़ता है।
Yoga Tips: 40 की उम्र में घुटनों के दर्द से हैं परेशान तो शुरू कर दें इन योगासनों का अभ्यास
अभी से योगाभ्यास की आदत बना लेंगे तो 60 की आयु के बाद भी चलने फिरने में अधिक दिक्कत और दर्द महसूस नहीं होगा।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन का अभ्यास शरीर को लचीला बनाने के साथ ही मांसपेशियों को मजबूत करता है। इससे रीढ़ की हड्डी और पीठ के दर्द से राहत मिलती है। शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। इस आसन का अभ्यास तनाव व चिंता कम करने के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े हो जाएं। अब पैरों के बीच करीब दो फीट की दूरी रखें और लंबी गहरी सांस लेते हुए शरीर को दाईं ओर झुकाएं। फिर बाएं हाथ को ऊपर की ओर ले जाएं। अपनी नजरें भी बाएं हाथ की उंगलियों पर टिकाएं। कुछ देर इस मुद्रा में रहे और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं। अब दूसरी ओर से ये प्रक्रिया अपनाएं।
मलासन
मलासन शरीर को टोन करता है। इस आसन के अभ्यास से कमर दर्द, घुटनों और हाथों के जोड़ों में दर्द दूर होता है। पाचन तंत्र सक्रिय करने से लेकर कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है। पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है। मलासन से टखने और घुटनों में लचीलापन आता है।
इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े होकर दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में ले आएं और धीरे से नीचे बैठें। सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। दोनों कोहनियों को जांघों के बीच 90 डिग्री के एंगल में ले जाएं और सामान्य तरीके से सांस लें। फिर सामान्य अवस्था में सीधे खड़े हो जाएं।
पर्श्वोत्तनासन
पर्श्वोत्तनासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और लचीलापन आता है। इस आसन से कूल्हों, कंधों और कलाइयों को मजबूती मिलती है। गर्दन, कंधों, कोहनी और कलाई में गठिया कम करने में पर्श्वोत्तनासन असरदार है।
इसे पिरामिड पोज भी कहते हैं। पर्श्वोत्तनासन का अभ्यास करने के लिए दाहिने पैर को आगे बढ़ाकर 45 डिग्री एंगल बनाएं। अब आगे की ओर झुकते हुए हाथों को नीचे जमीन पर सटाएं। इस दौरान घुटनों को मोड़ें नहीं। इस स्थिति में कुछ देर रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।जाएं।
नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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