देशभर में आज दीपावली के त्योहार की धूम है, हर तरफ लोग एक दूसरे के साथ दीपावली की खुशियां बांट रहे हैं। पर मिठाइयों, आतिशबाजी और उत्सव के इस त्योहार में सेहत को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। दीपावली के उत्सव के समय बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही, पहले से ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार रह चुके लोगों की समस्या बढ़ा सकती है। विशेषकर डायबिटीज, अस्थमा जैसे रोगियों को दिवाली के उत्सव के समय सर्तक रहने की जरूरत होती है।
आज का योग: दीपावली के दिन कीजिए यह चार योगासन, वजन और डायबिटीज दोनों रहेगा कंट्रोल में
अस्थमा रोगियों के लिए योग
दीपावली के दिन अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य समस्या के शिकार लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है। अस्थमा की जटिलताओं को कम करने के लिए प्राणायाम योगासन फायदेमंद माने जाते हैं। प्राणायाम का अभ्यास फेफड़ों को मजबूत बनाने के साथ सांस से संबंधित जटिलताओं को कम करने में सहायक होते हैं। प्राणायाम का अभ्यास फेफड़ों से संबंधित तमाम गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा, एलर्जिक ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और टीबी के खतरे को कम कर सकता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए योग
जिन लोगों को डायबिटीज की दिक्कत है उन्हें दिवाली में खान-पान को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डायबिटीज रोगियों के लिए चाइल्ड पोज यानी बालासन योग को लाभदायक माना जाता है। इस योग को करने के लिए मैट पर वज्रासन में बैठ जाएं। अब श्वास अंदर लेते हुए दोनों हाथों को सीधा सिर के उपर उठा लें। श्वास बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और हथेलियों और सिर को ज़मीन पर टिकाएं। लंबी श्वास अंदर लें और बाहर छोड़ें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ते हुए सिर को दोनों हथेलियों के बीच में धीरे से रखें।
प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत
शरीर को कई प्रकार की गंभीर बीमारियों और संक्रमण से बचाए रखने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत रखना आवश्यक होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए कोबरा पोज के साथ प्राणायाम का अभ्यास करना लाभदायक होता है। कोबरा पोज करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाइए और हथेली को कंधे के नीचे रखिए। सांस लेते हुए और शरीर के अगले भाग को ऊपर की और उठाएं। 10-20 सेकंड्स के लिए इसी अवस्था में रहिए फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं।
शरीर को ऊर्जावान रखने के लिए योग
दीपावली के उत्सव का पूरा आनंद लेने के लिए शरीर को ऊर्जावान रखना आवश्यक होता है। शरीर में ऊर्जा के संचार और तनाव-चिंता को दूर करने के लिए अनुलोम-विलोम का अभ्यास करना लाभदायक होता है। इस अभ्यास के लिए शांत मुद्रा में बैठ जाएं। अपनी आंखें बंद करें और दाहिने अंगूठे को नाक के दाहिने छिद्र पर रखें। अब बाईं तरफ से गहरी सांस लें औऱ दाहिनी ओर से छोड़ें। इसी तरह से नाक की दूसरी तरफ से भी सांस लें और छोड़ें।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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