अस्थमा सांस की एक गंभीर बीमारी है, दुनियाभर में लाखों लोग इसका शिकार हैं। सांस की नलियों में सूजन या फिर इनके सिकुड़ जाने के कारण ये दिक्कत होती है, इसमें सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ये दिक्कत किसी को भी हो सकती है। धूल-धुंआ, प्रदूषण और कुछ अन्य चीजें अस्थमा की समस्या को ट्रिगर करके अस्थमा अटैक का कारण भी बन सकती हैं, जिसमें अगर समय रहते जरूरी उपाय न किए जाएं तो ये जानलेवा भी हो सकती है।
सेहत की बात: क्या अस्थमा से भी किसी की मौत हो सकती है? अटैक के दौरान कौन सी सावधानियां सबसे जरूरी
अस्थमा अटैक में सांस की नलियां सिकुड़ने और सूजन बढ़ने से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। गंभीर अटैक जानलेवा हो सकता है। हाल में ही फ्लाइट में अस्थमा अटैक के कारण एक व्यक्ति की मौत ने लोगों को काफी डरा दिया है।
पहले इन घटनाओं पर नजर डाल लेते हैं।
- इसी हफ्ते, मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट में अस्थमा अटैक से भारतीय की मौत की खबर है। 58 वर्षीय व्यक्ति की यात्रा के दौरान तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ा था। उनके साथ सफर कर रहे यात्री-क्रू और विमान में मौजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने तुरंत मदद की लेकिन यात्री को बचाया नहीं जा सका।
- इसी तरह से जून 2023 में स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान 12 वर्षीय जोशुआ लॉयड की भी अस्थमा अटैक से मौत हो गई थी। वह जैवलिन-थ्रो (भाला फेंकने) की एक्टिविटी में हिस्सा ले रहा था। उसे तीन साल की उम्र में यह बीमारी हुई थी और वह स्टेरॉयड और साल्बुटामोल दोनों तरह के इनहेलर इस्तेमाल करता था। स्कूल में हुई इस घटना की जांच के बाद इस साल सितंबर के शुरुआती दिनों में अधिकारियों ने बताया कि जोशुआ की मौत का कारण गंभीर अटैक ही था।
अस्थमा और इसका खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पर्यावरण की कई स्थितियां अस्थमा अटैक का कारण बन सकती हैं।
- अटैक के दौरान फेफड़ों की सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। उनकी अंदरूनी परत में सूजन बढ़ जाती है और बलगम भी जमा हो सकता है। इससे हवा का अंदर-बाहर जाना मुश्किल हो जाता है और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
- एलर्जी, धुआं, वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, संक्रमण और व्यायाम जैसे कारण कुछ लोगों में अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं।
- सबसे जरूरी बात यह है कि अस्थमा अटैक के समय घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाया जाए तो स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है।
- समय पर इनहेलर का इस्तेमाल, खतरे के संकेतों को पहचानना और जरूरत पड़ने पर तुरंत इमरजेंसी मदद लेना स्थिति को बिगड़ने से रोकने में मददगार हो सकता है।
अस्थमा अटैक हो तो तुरंत क्या करें?
वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ प्रदीप अस्थाना कहते हैं, अस्थमा अटैक से जान जाने का भी खतरा रहता है, पर ऐसे मामले कम देखे जाते रहे हैं। समय रहते कुछ सावधानियां रोगियों में खतरे को कम करने और जान बचाने में मददगार हो सकती हैं।
- सबसे पहले समय रहते ये पहचानना जरूरी है कि आपको अस्थमा का अटैक हो रहा है या नहीं?
- अटैक होने पर सबसे पहले सीधे बैठें और शांत रहने की कोशिश करें। सीधे बैठना सांस लेने को आसान करता है।
- इसके बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए रिलीवर इनहेलर का इस्तेमाल करें। इनहेलर की सही तकनीक बहुत जरूरी है, ये पता न होने पर दवा की पर्याप्त मात्रा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती।
- अगर मरीज के पास स्पेसर है और उसके इनहेलर के साथ इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- अपनी तरफ से कोई और दवा, एंटीबायोटिक या घरेलू नुस्खे पर भरोसा करके इलाज में देरी न करें।
अगर इनहेलर लेने के बाद भी हालत बिगड़ रही है, आराम नहीं मिल रहा है या मरीज के पास इनहेलर ही नहीं है, तो तुरंत स्थानीय इमरजेंसी सेवा में लेकर जाएं।
अस्थमा अटैक कब हो जाता है जानलेवा?
डॉक्टर कहते हैं, अधिकतर मामले में अस्थमा अटैक होने पर दवा-इनहेलर लेने से मरीज को आराम मिल जाता है। हालांकि अगर मरीज को बहुत ज्यादा सांस लेने में परेशानी हो और दवा के बावजूद स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती जाए, तो खतरा बढ़ जाता है।
- सांस की दिक्कतों के साथ अगर बोलने में भी परेशानी हो, अत्यधिक थकान, सुस्ती या भ्रम हो तो ये स्थिति गंभीर संकेत हो सकती है।
- इनहेलर की निर्धारित खुराक लेने के बाद भी राहत न मिलना भी इमरजेंसी का संकेत है।
- ऐसे समय में घर पर इंतजार करना या खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश करना मुश्किलें बढ़ा सकता है।
- तुरंत मेडिकल मदद लेना आपको गंभीर खतरे से बचाने में मददगार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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