जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी के कारण पिछले कुछ वर्षों में लोगों में हड्डियों से संबंधित बीमारियों का जोखिम काफी अधिक बढ़ गया है। इसमें भी गठिया और रीढ़ की हड्डी से संबंधित दिक्कतें लोगों में काफी अधिक देखी जा रही हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि आर्थराइटिस जैसी जिन समस्याओं को एक दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कत माना जात था, वहीं कम उम्र के लोग भी अब इस समस्या से ग्रसित देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक समय के साथ लोगों में घटती शारीरिक निष्क्रियता को इसका प्रमुख कारण माना जाता सकता है।
आज का योगासन: आर्थराइटिस हो या रीढ़ की हड्डी में दिक्कत, इन योगाभ्यासों से कुछ ही दिन में दिखने लगेगा लाभ
कोबरा पोज योग
कोबरा पोज या भुजंगासन योग के अभ्यास को हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इसका नियमित अभ्यास रीढ़ और कमर की हड्डी को मजबूती देने और शरीर के लचीलेपन को बढ़ावा देने में भी सहायक है। जिन लोगों को रीढ़ से संबंधित समस्या या फिर पीठ के निचले हिस्से में अक्सर दर्द बनी रहती है उनके लिए कोबरा पोज योग का रोजाना अभ्यास करना काफी फायदेमंद हो सकता है।
ब्रिज पोज योग
कूल्हों, कमर और घुटनों के जोड़ और मांसपेशियों के लिए ब्रिज पोज या सेतुबंधासन योग के अभ्यास को काफी फायदेमंद माना जाता है। विशेषकर कमर दर्द की समस्या से परेशान लोगों के लिए यह योग काफी लाभदायक हो सकता है। इस योगासन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। हथेलियों को खोलते हुए हाथ को बिल्कुल सीधा जमीन पर सटा कर रखें। अब सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं, कंधे और सिर को सपाट जमीन पर ही रखें। सांस छोड़ते हुए दोबारा से पूर्ववत स्थिति में आ जाएं।
वीरभद्रासन योग के लाभ
शरीर के सभी जोड़ों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए वीरभद्रासन योग को सबसे लाभदायक माना जाता है। कूल्हे, घुटने और फ्रंट लेग की हड्डियों को मजबूती देने और शरीर के लचीलेपन को सुधारने में इस योग का अभ्यास लाभदायक माना जाता है। वीरभद्रासन योग न सिर्फ हड्डियों के लिए फायदेमंद है साथ ही शरीर में रक्त के संचार को बेहतर करने में भी इस योग को काफी फायदेमंद माना जाता है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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