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बदलते मौसम के साथ एलर्जी से हैं परेशान, ये उपाय देंगे आराम

Thu, 26 Oct 2017 08:49 AM IST
amarujala.com- Presented by: मंजू ममगाईं
amarujala.com- Presented by: मंजू ममगाईं Updated Thu, 26 Oct 2017 08:49 AM IST
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These precautions will help you to avoid seasonal allergies
मेडिसिटी गुड़गांव के ईएनटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉक्टर के के हांडा ने बीबीसी को बताया कि 'ज़्यादातर लोग मौसमी एलर्जी से परेशान हैं। नाक से पानी गिर रहा है, छाती जकड़ गई है, सांस लेने में परेशानी है, कान और गले में दर्द है और कुछ मामलों में आंखों में जलन और खुजली की शिकायत भी है'। 


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These precautions will help you to avoid seasonal allergies
डॉक्टर हांडा बताते हैं कि गला-नाक-आंख-कान यह सारे अंग आपस में जुड़े हैं, इसलिए अगर एक में भी परेशानी हुई तो बढ़कर बाक़ी तक भी पहुंच सकती है। इनमें से ज़्यादातर परेशानियां प्रदूषण से जुड़ी हैं।

दिवाली के आस-पास प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है क्योंकि पटाखे छुटाए जाते हैं। गांव में पुआल जलाई जाती है और मौसम में नमी आने लगती है जो प्रदूषण और धुएं को ऊपर उठने से रोकती है।
These precautions will help you to avoid seasonal allergies
दमा के मरीजों को सबसे ज़्यादा नुकसान
दुनिया भर के दमा मरीजों में से दस फीसदी भारत में रहते हैं। डब्ल्यूएचओ पहले ही बता चुका है कि दुनिया के सबसे गंदी आबोहवा वाले 20 शहरों में से 13 शहर भारत में हैं। ऐसे में हवा में रुका यह जहर सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है।

सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर चेस्ट कंसल्टेंट डॉक्टर बॉबी भलोत्रा के मुताबिक 'इतने प्रदूषण में दमा के मरीज़ को अटैक आ सकता है और कभी-कभी समय पर मदद न मिले तो दमा का अटैक जानलेवा भी हो सकता है'। 
 
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अब चेतना जरूरी
बीबीसी से बातचीत में डॉक्टर भलोत्रा ने बताया कि इतना प्रदूषण सिगरेट के धुएं से भी कई गुना ज़्यादा खतरनाक है। उनका मानना है कि 'अगर हम अब भी नहीं चेते और प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगले 15-20 साल में छोटी उम्र में ही फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आने लगेंगे'।

डॉक्टर भलोत्रा की सलाह है कि अगर सांस में थोड़ा भारीपन महसूस हो, छाती और गले में घर-घर की आवाज आए तो देर न करें और तुरंत अपना ब्लड प्रेशर और छाती का चेकअप कराएं।
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एहतियात की जरूरत
सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़) के मरीज़ों को और भी एहतियात रखने की जरूरत है। उनके लिए डॉक्टर भलोत्रा की सलाह है कि 'अपनी दवाई लगातार लेते रहें और इन्हेलर हमेशा साथ रखें'।

प्रदूषण का असर त्वचा पर भी पड़ता है। महक डर्मा एंड सर्जरी क्लीनिक की डायरेक्टर डॉक्टर शेहला अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि इस मौसम में छपाकी यानी त्वचा पर लाल चकत्ते की शिकायत वाले मरीज ज़्यादा आ रहे हैं।
 
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