शरीर के संपूर्ण फिटनेस के लिए सभी अंगों की सेहत पर ध्यान देना आवश्यक माना जाता है। छोटी से छोटी हड्डी या मांसपेशियों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है, यही कारण है कि सभी लोगों को नियमित रूप से योगासनों के अभ्यास की सलाह दी जाती है। योग मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की समस्याओं को ठीक रखने के साथ मांसपेशियों पर होने वाले तनाव को कम करते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों में होने वाली दर्द की समस्या से आसानी से राहत पाया जा सकता है।
Yoga Tips: पीठ, कोर और रीढ़ की मजबूती के लिए कीजिए शलभासन योग का अभ्यास, इसके अन्य लाभ भी जानिए
कैसे किया जाता है शलभासन का अभ्यास
शलभासन का अभ्यास थोड़ा कठिन होता है जिसके लिए आपको एकाग्रता और निरंतर अभ्यास करते रहने की आवश्यकता होती है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब सांस लेते हुए अपने पैरों और धड़ को ऊपर उठाएं। अपने घुटनों को सीधा रखते हुए पैर को ऊपर की ओर उठाएं। हथेलियों को नीचे की ओर रखें। आपका वजन आपके पेल्विक हिस्स, पेट और निचली पसलियों पर होना चाहिए। कुछ देर तक इसी मुद्रा में बने रहें, फिर सांस छोड़ते हुए अपने पैरों और सिर को धीरे-धीरे नीचे फर्श पर ले आएं।
अपने शरीर को आराम दें और इसी प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएं।
शलभासन अभ्यास के क्या लाभ हैं?
शलभासन योग का अभ्यास कई प्रकार से आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
- यह पेट की चर्बी को कम करने और पेट को टोन करने में मदद करता है।
- यह अभ्यास आपकी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक है।
- इससे आपकी गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सर्वाइकल की समस्याओं में इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है।
- यह आंतों की गतिविधि में सुधार करके बेहतर पाचन में मदद करता है।
- मूत्र विकारों को ठीक करने में भी इसे फायदेमंद अभ्यास माना जाता है।
- यह प्रजनन प्रणाली को मजबूती देता है और गर्भाशय की कई समस्याओं में भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
शलभासन अभ्यास के दौरान सावधानियां
वैसे तो शलभासन योग को सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है पर कुछ स्थितियों में इस अभ्यास को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिन लोगों को पीठ में गंभीर दर्द या स्लिप डिस्क की दिक्कत है उन्हें इस मुद्रा से बचना चाहिए। गंभीर साइटिका वाले लोगों को भी इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। मासिक धर्म या गर्भावस्था के दौरान भी इस योग का अभ्यास न करें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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