स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने लिए लिवर और पाचन अंगों का स्वस्थ रहना आवश्यक माना जाता है। इसके लिए आहार को ठीक रखने के साथ शारीरिक रूप से सक्रियता बनाए रखना आवश्यक होता है। दिनचर्या में योगासनों के अभ्यास को शामिल करके पेट के तमाम अंगों को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है। कुछ प्रकार के योगासन न सिर्फ पेट के अंगों को स्वस्थ रखते हैं साथ ही कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी नियमित योगासनों के लाभ देखे गए हैं।
Yoga Tips: लिवर को मजबूती देकर पेट की समस्याओं को कम करता है नौकासन योग, जानिए इसका तरीका और लाभ
नौकासन योग कैसे किया जाता है?
नौकासन योग का अभ्यास हर उम्र के लोग कर सकते हैं, इसके लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है जिससे योग को सही तरीके से करके अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके। इस योग के अभ्यास के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटें और हाथों को शरीर के बगल में रखें। गहरी सांस लें और अपनी छाती और पैरों को ऊपर उठाएं। बाहों को अपने पैरों की ओर फैलाएं। आपकी आंखें, उंगलियां और पैर की उंगलियां एक सीध में होनी चाहिए। पेट की मांसपेशियों पर दबाव बनाने के लिए अपने नाभि क्षेत्र में तनाव महसूस करें। कुछ समय तक इस स्थिति में बने रहें और फिर पूर्ववत आ जाएं।
इस अभ्यास को रोजाना 5-10 मिनट तक करने की आदत बनाएं।
नौकासन योग से शरीर को होने वाले लाभ
योग विशेषज्ञ कहते हैं, नौकासन योग कई प्रकार से शरीर के अंगों के लिए कारगर हो सकता है। पाचन अंगों के साथ-साथ इसका असर पीठ-पैरों की मांसपेशियों पर भी देखा गया है।
- पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
- पैर और हाथ की मांसपेशियों को टोन करने में इसके लाभ हैं।
- हर्निया वाले लोगों को इस योग से लाभ मिल सकता है, डॉक्टर की सलाह पर ही इसका अभ्यास करें।
- यह योगासन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है।
- पाचन में सुधार करने के साथ लिवर, अग्न्याशय और फेफड़ों के कार्य को बेहतर करने में भी इस आसन के लाभ हैं।
- किडनी, थायरॉयड और प्रोस्टेट ग्रंथियों के लिए भी इस योग के अभ्यास को फायदेमंद पाया गया है।
नौकासन योग को लेकर सावधानियां
योग विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ प्रकार की शारीरिक समस्याओं में नौकासन योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए। यदि आपको लो ब्लड प्रेशर, गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन रहता है या फिर हाल के दिनों में रीढ़ की हड्डी की किसी भी समस्या से परेशान रहे हैं तो इस योग को न करें। अस्थमा और हृदय रोगियों को भी इस मुद्रा से बचने की सलाह दी जाती है। महिलाओं को गर्भावस्था और मासिक धर्म के दिनों में इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। किसी भी योग से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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