तेज रफ्तार से चल रही जिंदगी के कारण आज के समय में इंसान अपने खान-पान समेत शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। नतीजन उसे कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं परेशानियों में से एक है अर्थराइटिस। अर्थराइटिस या गठिया हड्डियों के जोड़ों की बीमारी है। ज्यादा देर तक बैठे रहने या कोई शारीरिक श्रम न करने के कारण जोड़ों में जकड़न होने लगती है, जो अर्थराइटिस का रूप ले लेती है। अर्थराइटिस में होने वाला दर्द असहनीय होता है। हालांकि योगा के कुछ आसनों के नियमित अभ्यास से आप गठिया के दर्द से राहत पा सकते हैं। आइए जानते हैं इन योगासनों के बारे में...
अंतर्राष्ट्रीय योग सप्ताह: अर्थराइटिस के दर्द को दूर कर देंगे ये 5 योगासन, नियमित करें अभ्यास
शवआसन
शव अर्थात मुर्दा, शरीर को मुर्दे समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवआसन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को आराम से फैला लें। अपने पैरों के पंजों को बाहर और एड़ियों को अंदर की ओर रखें। अपने दोनों हाथों को शरीर से करीब 6 इंच की दूरी पर रखें। अपनी हाथों की अंगुलियां मुड़ी हुई, गर्दन सीधी रखें। इस आसन को करते समय अपनी आंखो को बंद रखें।
मत्स्यासन
मत्स्यासन के अभ्यास से अर्थराइटिस के रोगियों को बहुत लाभ मिलता है। इस आसन से पेट की सभी मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। मत्सयासन के अभ्यास से पेट में गैस और कब्ज की समस्या भी नहीं होती है। इसे करने के लिए दण्डासन में बैठकर दाएं पैर को बाएं पैर पर रखकर अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब अपने हाथों का सहारा लेते हुए पीछे की ओर अपनी कोहनियां टिकाकर लेट जाएं। पीठ और छाती ऊपर की ओर उठी तथा घुटने भूमि पर टिकाकर रखें। अब अपने हाथों से पैर के अंगूठे पकड़ें। ध्यान रखें आपकी कोहनी जमीन से लगी होनी चाहिए।
प्राणायाम
प्राणायाम करने के लिए किसी समतल जगह पर चटाई बिछाकर पालथी मारकर बैठ जाएं। अब बाएं नाक को दबाकर दाहिने नाक से सांस को अंदर करके दोनों नाकों से सांस को बाहर निकालें। गठिया के मरीजों को प्राणायम करने से बहुत ही राहत मिलती है। सुबह-सुबह साधारण प्राणायम करने से इस रोग से होने वाले दर्द में आपको राहत मिलेगी।
गोमुखासन
गोमुखासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं। इसके बाद अपने बाएं पैर की एड़ी को उठाकर दाएं पैर के कूल्हे के पास रख दें। इसके बाद अपने दाएं पैर को बाएं पैर के ऊपर रख दें। अब अपने दाएं हाथ को पीठ के पीछ लें जाएं और अपने बाएं हाथ को कोहनी से मोड़ते हुए दाएं हाथ से मिला लें। आप इस अवस्था में करीब 2-3 मिनट तक रह सकते हैं।