Dandasana Benefits and Precautions: योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। योग से कई तरह की शारीरिक समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। दंडासन को स्टाफ पोज कहा जाता है। यह एक शुरुआती स्तर का आसन है, जिसके अभ्यास के लिए योगी को एक सीधी पोजीशन में रीढ़ रखने की आवश्यकता होती है। अगर हैमस्ट्रिंग या पिंडलियों में कोई समस्या है तो इस आसन का अभ्यास करना लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं दंडासन के अभ्यास का सही तरीका और इससे होने वाले फायदों के बारे में।
Dandasana: दंडासन के फायदे, जानिए अभ्यास का सही तरीका और सावधानियां
दंडासन के फायदे
- पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
- कंधों और छाती में खिंचाव लाता है
- शरीर की मुद्रा में सुधार लाता है
- रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं
- यह एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है
- अस्थमा की बीमारी से दंडासन योगाभ्यास बचाता है
- पाचन को बेहतर बनाता है
- दिमाग को रिलैक्स करता है
- पोस्चर में सुधार करता है
- साइटिका से राहत दिलाता है
दंडासन करने के सही तरीका
इस आसन के अभ्यास के लिए जमीन पर बैठकर पैरों को आगे फैलाएं। जितना हो सके पैरों को आगे स्ट्रेच करें।
पैरों को एक साथ मिलाकर दोनों पैरों को रिलैक्स करें। जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करें। फिर कंधों को कूल्हों के ऊपर ले जाते हुए रीढ़ को सीधा रखें। इसके लिए बाजुओं का सपोर्ट लें। हथेलियां कूल्हों के दोनों ओर फर्श पर टिकाएं। सांस लें और रीढ़ सीधी रखीं। पैरों को पूरी तरह से व्यस्त रखते हुए कुछ पल इसी अवस्था में रहें।
दंडासन के दौरान सावधानियां
- अगर कलाई में चोट हो तो दंडासन करने से बचें।
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द या चोट हो तो दंडासन न करें।
- अभ्यास के दौरान शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगाएं।
दंडासन से पहले और बाद में कौन से योग करें
दंडासन के अभ्यास से पहले कुछ योग करने चाहिए। जैसे दंडासन से पहले अधोमुख श्वानासन और उत्तानासन करना चाहिए। वहीं दंडासन के बाद पूर्वोत्तानासन और भारद्वाज ट्विस्ट का अभ्यास करें।
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