एक अध्यन में पता चला है कि प्रेगनेंसी के दौरान मछली खाने से गर्भस्थ शिशु और मां दोनों को फायदा होता है। प्रेगनेंसी के दौरान मछली खाने वाली महिलाओं के गर्भस्थ शिशु का अस्थमा से बचाव होता है।
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ऐसा ही फिश ऑयल के सप्लिमेंट्स लेने वाली महिलाओं के मामले में भी देखने को मिलता है। गर्भावस्था में महिला को साल्मन, ट्राउट, ट्यूना मछलियों का सेवन करना चाहिए। ये मछलियां खासतौर पर फायदेमंद होती हैं। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा के शोधकर्ताओं ने दो अध्ययनों की समीक्षा की।
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वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वो बच्चे जिनकी माताओं ने प्रेंगनेंसी में छह से नौवें महीने के दौरान ओमेगा-3 फैटी एसिड का अधिक डोज लिया था, उनमें सांस संबंधी समस्याएं कम पाई गईं। शोध में 346 प्रेगनेंट महिलाओं को शामिल किया गया।
प्रेगनेंसी में मछली का सेवन करना लाभदायक है। इससे मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को प्रोटीन और आयरन मिलता है। एक प्रेगनेंट महिला को एक दिन में कम से कम 27 मिलीग्राम आयरन का सेवन करना जरूरी होता है। इससे गर्भवती महिला को एनिमिया के खतरे से छूटकारा मिलता है।
मछली प्रोटीन और आयरन का भी अच्छा स्रोत है। मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि प्रेगनेंट महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए काफी जरूरी होता है। इस एसिड से बच्चे का दिल सुरक्षित होता है और उसके मस्तिष्क का विकास भी होता है। शोध के मुताबिक, मछली के ऊतकों और पेट के आसपास तेल होता है। मछली की फिलेट्स में 30 प्रतिशत तक तेल होता है। हालांकि ये आंकड़े मछली की प्रजाति पर निर्भर करते हैं।