प्रतिवर्ष 23 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे मुख्य कारण है कि लोगों को मौसम विज्ञान और इसमें हो रहे बदलावों के प्रति जागरूक करना है। मौसम विज्ञान दिवस मनाने में विश्व मौसम संगठन का अहम योगदान होता है। संगठन द्वारा ही प्रतिवर्ष मौसम विज्ञान से जुड़ा एक नया विषय लाया जाता है, जिसपर पूरे वर्ष काम होता है। अगली स्लाइड्स से जानिए विश्व मौसम विज्ञान दिवस का महत्व, इतिहास एवं इस वर्ष का विषय।
World Meteorological Day 2021: जानिए विश्व मौसम विज्ञान दिवस का महत्व, इतिहास एवं इस वर्ष का विषय
विश्व मौसम विज्ञान दिवस का इतिहास
सन् 1950 में आज से 71 साल पूर्व विश्व मौसम विज्ञान संगठन की स्थापना की गई थी। संस्था के अस्तित्व अथवा स्थापना के जश्न को मनाने के लिए प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। विभिन्न देश विश्व मौसम विज्ञान संगठन के सदस्य हैं। सदस्य राष्ट्र प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से विश्व मौसम विज्ञान दिवस को एक विशेष विषय के साथ मनाते आ रहे हैं।
विश्व मौसम विज्ञान दिवस का विषय
विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2021 का विषय विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा ‘महासागर, जलवायु और मौसम’ तय किया गया है। इसी के साथ विश्व के सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान के संयुक्त राष्ट्र दशक की शुरुआत भी इसी के साथ की जा रही है। पिछले वर्ष इस दिवस का विषय ‘मौसम और जल’ रखा गया था। इस बार के विषय के अनुसार महासागरों का संरक्षण केंद्र में है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन
विश्व मौसम विज्ञान संगठन का मुख्यालय जिनेवा, स्वीटजरलैंड में स्थित है। यह संगठन पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके संबंध और मौसम की जानकारी देता है। कुल 191 देश एवं क्षेत्र संगठन के सदस्य हैं। संगठन समय-समय पर बाढ़, भूकंप एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान लगाकर विश्व को आगाह करता है।
इस तरह मनाया जाता है विश्व मौसम विज्ञान दिवस
विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर विश्वभर में संगोष्ठियों एवं बैठकों का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रमों में वैज्ञानिक विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करते हैं। आजकल विद्यालयों में इस तरह के दिवसों को मनाया जा रहा है जिसमें वैज्ञानिकों को बतौर अतिथि बुलाया जाता है और वे विषय के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करते हैं। कोरोनाकाल में यह सभी आयोजन ऑनलाइन हो चुके हैं, ऐसे में परिचर्चाओं का आयोजन इसी तरह से होने जा रहा है।