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अक्टूबर में है घूमने का प्लान तो जाएं देश की इस सबसे अनोखी जगह, खोया हुआ सुकून मिल जाएगा वापस
Thu, 08 Aug 2019 01:42 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Thu, 08 Aug 2019 01:42 PM IST
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हिल स्टेशन, देश-विदेश की यात्रा, लोकल यात्रा तो बहुत की होगी आपने। घुमक्कड़ी जीवन जीने का सबसे बड़ा फायदा होता है कि दुनिया के शोर-शराबे से लेकर घोर शांति तक सब जगह घूमते हैं। हालांकि अगर घुमक्कड़ी नहीं भी हैं और साल में एक बार घूमने निकलते हैं तो जब भी समय मिले देश की इन जगहों पर जरूर जाएं खोया हुआ सुकून वापस मिल जाएगा।
थिकसे मोनेस्ट्री
लेह क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर भारत में दूसरा सबसे प्रमुख मठ थिकसे मठ है। इस मठ में कई इमारतों को उनके महत्व और आकार के आरोही क्रम में पहाड़ी-ढलान के ऊपर से व्यवस्थित किया गया है। पूरी व्यवस्था ग्रीस की याद दिलाती है, जहां सफेद रंग की इमारतों का समूह है। 49 फीट ऊंची मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा यहां के आकर्षण का केंद्र है। जब मौसम बादलों से भरा होता है, तो इस मठ से आपको लेह बादलों से पूरी तरह घिरा हुआ दिखेगा। यहां कि हवा बिल्कुल जादुई है और भिक्षुओं के साथ यहां रुकना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।
लेह क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर भारत में दूसरा सबसे प्रमुख मठ थिकसे मठ है। इस मठ में कई इमारतों को उनके महत्व और आकार के आरोही क्रम में पहाड़ी-ढलान के ऊपर से व्यवस्थित किया गया है। पूरी व्यवस्था ग्रीस की याद दिलाती है, जहां सफेद रंग की इमारतों का समूह है। 49 फीट ऊंची मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा यहां के आकर्षण का केंद्र है। जब मौसम बादलों से भरा होता है, तो इस मठ से आपको लेह बादलों से पूरी तरह घिरा हुआ दिखेगा। यहां कि हवा बिल्कुल जादुई है और भिक्षुओं के साथ यहां रुकना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।
रुमटेक मठ
इस मठ में सुबह के वक्त में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा की जाने वाली प्रार्थना बहुत मनमोहक होती है। सिक्किम में सबसे सुंदर और सबसे बड़े मठों में से एक है रुमटेक मठ। इस मठ में विभिन्न थांगका पेंटिंग, दुर्लभ बौद्ध कलाकृतियां, भगवान बुद्ध के 1001 सोने के मॉडल और ऐसी कई आकर्षक चीजें हैं। मठ में बहुत सारी गतिविधियां और अनुष्ठान सेवाएं हैं, जिनमें सुबह और शाम का जप शामिल है। यह मठ धर्म चक्र के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। तिब्बत के बाहर काग्यू वंश के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक रुमटेक मठ तिब्बत के सुरफू मठ के जैसा ही बनावाया गया है।
इस मठ में सुबह के वक्त में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा की जाने वाली प्रार्थना बहुत मनमोहक होती है। सिक्किम में सबसे सुंदर और सबसे बड़े मठों में से एक है रुमटेक मठ। इस मठ में विभिन्न थांगका पेंटिंग, दुर्लभ बौद्ध कलाकृतियां, भगवान बुद्ध के 1001 सोने के मॉडल और ऐसी कई आकर्षक चीजें हैं। मठ में बहुत सारी गतिविधियां और अनुष्ठान सेवाएं हैं, जिनमें सुबह और शाम का जप शामिल है। यह मठ धर्म चक्र के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। तिब्बत के बाहर काग्यू वंश के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक रुमटेक मठ तिब्बत के सुरफू मठ के जैसा ही बनावाया गया है।
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चार मंजिला है यह मठ
यह चार-मंजिला मठ पूरे सिक्किम में सबसे बड़ा मठ है। तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद, तिब्बत के 16वें ग्यालवा करमापा के अवतार कुछ भिक्षुओं के साथ रुमटेक आए थे। तब के चोग्याल ने मठ का निर्माण करने, धार्मिक अध्ययन के लिए एक केंद्र खोलने के उद्देश्य से उनको रुमटेक का एक क्षेत्र तोहफे में दिया था।
यह चार-मंजिला मठ पूरे सिक्किम में सबसे बड़ा मठ है। तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद, तिब्बत के 16वें ग्यालवा करमापा के अवतार कुछ भिक्षुओं के साथ रुमटेक आए थे। तब के चोग्याल ने मठ का निर्माण करने, धार्मिक अध्ययन के लिए एक केंद्र खोलने के उद्देश्य से उनको रुमटेक का एक क्षेत्र तोहफे में दिया था।
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अक्टूबर में जरूर जाएें
मठ के पीछे, बहुत अधिक सजा हुआ और सुंदर कर्मा नालंदा इंस्टिट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज है। वहां एक छोटा सा हॉल भी है, जहां सोने का स्तूप है। रुमटक धर्म चक्र केंद्र मठ से करीब 2 किमी दूर है। यहां अक्टूबर में वार्षिक नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम होते हैं। रुमटेक मठ 300 वर्ष पुराना माना जाता है।
मठ के पीछे, बहुत अधिक सजा हुआ और सुंदर कर्मा नालंदा इंस्टिट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज है। वहां एक छोटा सा हॉल भी है, जहां सोने का स्तूप है। रुमटक धर्म चक्र केंद्र मठ से करीब 2 किमी दूर है। यहां अक्टूबर में वार्षिक नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम होते हैं। रुमटेक मठ 300 वर्ष पुराना माना जाता है।