यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है वह जगह जहाँ आप रुकते हैं, ठहरते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि आपको प्लानिंग के बिना बीच रास्ते में रुकने की जगह चाहिए होती है। इसलिए आजकल लगभग हर शहर, कस्बे और यहाँ तक कि गाँवों के बाहर या आस पास तक यात्रियों के रुकने के ठिकाने होते हैं। यहाँ आपको केवल रुकने की सुविधा भी मिल सकती है और कई बार रुकने के साथ ही ढेर सारी अन्य सुविधाएँ भी। ये ठिकाने कई प्रकार के हो सकते हैं,जैसे लॉज, होटल या फिर मोटल,आदि । हालाँकि मोटल हमारे देश में इतना प्रचलित नहीं रहा जितना विदेशों में लेकिन पर्यटन के बदलते ट्रेंड के साथ अब यह भी एक आम साधन होता जा रहा है। भारत में आपको ढाबों जैसी जगहों पर या कुछ जगह पेट्रोल पंप के आस पास मोटल जैसे ठिकाने मिल सकते हैं। आइये जानें क्या हैं फर्क इन तीनों में और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।
Trip and accomodation: समझिये अंतर होटल, मोटल और लॉज में
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मोटल
ज्यादातर हाइवे यानी सफर के रास्तों पर स्थित होता है यह ठिकाना। यूं भारत में भी आपको कुछ ढाबों पर मोटल के रूप में रुकने का ठिकाना मिल सकता है लेकिन यह सबके लिए कितना सुरक्षित होगा इसकी ग्यारंटी नहीं दी जा सकती। हां आजकल कुछ जगह बकायदा मोटल भी दिखाई देने लगे हैं। बहरहाल, मोटल को आप होटल का छोटा भाई या बहन भी कह सकते हैं। इसमें सुविधाएँ लगभग होटल जैसी ही होंगी लेकिन यह आकार में छोटी होंगी, इनमें भोजन की सुविधा होटल जितनी अच्छी नहीं होगी और सबसे ख़ास बात, यह आपको एक या दो दिन का अकोमोडेशन ही उपलब्ध करवा पाएंगी। बजट के मामले में यह होटल से कहीं कम होंगी और आपको अपनी गाड़ी के लिए यहाँ पार्किंग की बहुत जगह मिलेगी।
होटल
1 स्टार से लेकर कई स्टार सुविधाएँ प्रदान करने वाला स्थान और अमूमन यह आपको शहर के आस पास या शहर में ही मिलेगा। इसमें लॉजिंग से लेकर रेस्त्रां, स्वीमिंग पूल, जिम जैसी कई सुविधाएँ मिल सकती हैं। सबसे ख़ास बात यह कि इनके लिए आप प्री बुकिंग का ऑप्शन आसानी से अपना सकते हैं। यानी आप अपनी ट्रेवल प्लानिंग में इसको शामिल करके कई तरह की छूट का फायदा भी ले सकते हैं। इसमें आपके बजट और सुविधा के हिसाब से कई विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही यहाँ आप शादी-सगाई से लेकर कॉन्फ्रेंस और मीटिंग जैसे आयोजन भी आसानी से कर सकते हैं।
लॉज
आकार और सुविधाओं दोनों ही मामलों में होटल से कमतर और कुछ मामलों में मोटल से भी क्योंकि लॉज में कुछ भी खाने की व्यवस्था मिले यह मुश्किल है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर यात्रियों द्वारा रात सोने या कुछ समय ठहरने अथवा केवल सामान को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए आपको किसी जगह पर दिनभर घूमना है लेकिन आप होटल पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते तो लॉज में सामान रखकर और नहा-धोकर आप दिनभर घूम सकते हैं और सामान लेकर वापस रवाना हो सकते हैं। तीर्थस्थानों पर बड़ी संख्या में लॉज की सुविधा मिल सकती है और आजकल लॉज वालों ने कुछ जगहों पर भोजन की सुविधा भी उपलब्ध करवाना शुरू की है लेकिन हमेशा इसकी ग्यारंटी नहीं होती।
ये भी हैं ठिकाने
लॉज, होटल और मोटल के अलावा और भी ऐसे ठिकाने होते हैं जहाँ यात्रियों, पर्यटकों के रुकने, खाने आदि की व्यवस्था हो सकती है। इसमें भी आपके बजट के हिसाब से विकल्प मिल सकते हैं। उदाहरण के लिए हॉस्टल्स। आपको भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थलों पर भी हॉस्टल मिल सकते हैं जहाँ आमतौर पर होटल या अन्य सुविधाएँ मिलना मुश्किल होती हैं। हॉस्टल की सुविधा अधिकांशतः अकेले या दोस्तों के साथ सफर कर रहे लोगों के लिए होती है क्योंकि यहाँ परिवार के लिहाज से सभी सुविधाएँ मिलने में मुश्किल आती है। बजट के मामले में यह बहुत सस्ता और अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आप लक्ज़री के साथ, बिना बजट की परवाह किये कोई ठिकाना चाहते हैं तो आपके लिए रिसॉर्ट्स का विकल्प शानदार होगा। इनके अतिरिक्त कई क्लब और संस्थान अपने प्राइवेट होस्टल्स और रिसॉर्ट्स या गेस्ट हॉउस भी संचालित करते हैं जहाँ आपको सभी सुविधाएँ मिलती हैं। लेकिन इसके लिए आपका उनका सदस्य होना आवश्यक है।