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Republic Day 2023: देश के इस गांव में नहीं चलता भारतीय कानून, यहां है खुद की संसद और संविधान

Thu, 26 Jan 2023 04:47 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 26 Jan 2023 04:47 PM IST
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Republic Day 2023: Law Of India Does Not Work At Malana Village in Himachal Pradesh Travel Detail
प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock

Republic Day 2023:  भारतवासी आज गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। आज ही के दिन संविधान लागू हुआ था। इस संविधान के आधार पर ही पूरे देश की कानून व्यवस्था चलती है।भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान का अनुसरण करना होता है।भारत विविधताओं का देश है, जहां कई राज्य, अलग भाषा, धर्म और जातियों के लोग रहते हैं। सभी के लिए समान कानून लागू है लेकिन क्या आपको पता है कि भारत का एक ऐसा गांव भी है, जहां देश का कोई कानून नहीं चलता। इस गांव का अपना संविधान है। यहां के लोग खुद ही न्यायपालिका होते हैं, खुद ही व्यस्थापिका और कार्यपालिका होते हैं। खुद का चुनाव कर सदन के सदस्यों को चयन करते हैं। यहां के लोग खुद के संविधान और कानून के दायरे में आते हैं। इस गांव का इतिहास और रहन सहन काफी रोचक हैं। आइए जानते हैं कहां स्थित है यह गांव, जहां नहीं चलता भारत का संविधान। क्या है इस गांव का रहस्य?

Republic Day 2023: Law Of India Does Not Work At Malana Village in Himachal Pradesh Travel Detail
मलाणा गांव - फोटो : Facebook

देश का अजब गजब गांव

भारत में कई अजब गजब जगहें हैं, इन्हीं जगहों में हिमाचल प्रदेश का एक गांव भी है। हिमाचल प्रदेश के इस गांव का नाम मलाणा है। कुल्लू जिले के दुर्गम इलाके में स्थित मलाणा गांव अपनी कई गतिविधियों के कारण चर्चा में रहता है। इस गांव में कोई भी भारतीय कानून नहीं चलता, गांव के अपने नियम हैं। इस गांव की खुद की संसद है, जहां सारे फैसले लिए जाते हैं।

Republic Day 2023: Law Of India Does Not Work At Malana Village in Himachal Pradesh Travel Detail
मलाणा गांव का अपना कानून - फोटो : facebook

मलाणा गांव का अपना कानून

भले ही हिमाचल प्रदेश भारत का अंग है लेकिन मलाणा गांव की न्यायपालिका अपनी है। गांव की अपनी संसद है, जिसमें दो सदन है- पहली ज्योष्ठांग (ऊपरी सदन) और दूसरी कनिष्ठांग (निचला सदन)। ज्येष्ठांग में कुल 11 सदस्य हैं, इनमें से तीन कारदार, गुरू व पुजारी होते हैं, जो कि स्थाई सदस्य हैं। बाकि के आठ सदस्यों को ग्रामीण मतदान करके चयनित करते हैं। कनिष्ठांग सदन में गांव के हर घर से एक सदस्य प्रतिनिधि होता है। संसद भवन के तौर पर यहां एक ऐतिहासिक चौपाल है, जहां सारे विवादों के फैसले होते हैं।

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मलाणा गांव के अजब नियम - फोटो : facebook

मलाणा गांव की दीवार छूने की मनाही

इस गांव से जुड़े कई अजीब नियम हैं, जिसमें से एक गांव में दीवार न छूने का नियम है। कोई भी बाहरी व्यक्ति गांव की दीवार को नहीं छू सकता है। अगर कोई नियम तोड़ता है तो जुर्माना देना पड़ सकता है। यहां आने वाले पर्यटक गांव के बाहर ही रहते हैं, ताकि वह गांव की दीवार तक न छू पाएं।

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फसल - फोटो : Facebook/

फसल

मलाणा गांव दुनिया में सबसे अधिक चरस की खेती के लिए मशहूर है। इस गांव के आसपास मारिजुआना यानी गांजा उगाया जाता है, जिसे मलाणा क्रीम कहते हैं। यहां के लोग चरस के अलावा कोई और फसल नहीं उगाते और इसे काला सोना मानते हैं। यह उनकी रोजीरोटी का मुख्य जरीया है।

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