पाकिस्तान का नाम आते ही हमारे जहन में तमाम बातें आने लगती हैं, लेकिन क्या आपको मालूम है कि वह भी हमारे देश की ही तरह बेहद खूबसूरत है। बहुत कम लोग जानते हैं कि पाकिस्तान भी एक खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस है। यहां की खूबसूरत वादियां, हरियाली और प्राकृतिक नजारे किसी का भी मन मोह लेंगे। खासकर कश्मीर रीजन और नॉर्दर्न पाकिस्तान टूरिस्ट्स के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
भारत की ही तरह पाकिस्तान भी है बेहद खूबसूरत, घूमने के लिए हैं ये सबसे अच्छी जगहें
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गिलगित बाल्टिस्तान
अपने ट्रिप की शुरुआत नॉर्दर्न पाकिस्तान से करें। गिलगित बाल्टिस्तान के मनोहर दृश्य आपकी आंखों के जरिए दिल में उतर जाएंगे। यहां कई सारी एडवेंचर एक्टिविटीज भी हैं, जिन्हें आप एन्जॉय कर सकते हैं। इस जगह की खूबसूरती का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां करीब हर पहाड़ी 20 हजार फुट से ज्यादा ऊंची है। गिलगित-स्कार्दू रोड का रास्ता बेहद खूबसूरत होने के साथ भयानक भी है। कई जगहों पर ये सड़क इतनी छोटी है कि वहां से एक बार में बस एक वाहन निकल सकता है। इस रास्ते को सबसे कठिनाई भरे रास्तों में गिना जाता है। गिलगित बाल्टिस्तान में एक पर्वतीय घाटी हुंजा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। माना जाता है कि ये हिस्सा भारत का है, जिस पर पाकिस्तान ने अपना कब्जा किया हुआ है।
मुल्तान
मुल्तान जिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पड़ता है। यह शहर प्राचीन युद्ध, व्यापार, राजवंशीय शासन और सूफीवाद के लिए जाना जाता है। चिनाब नदी के किनारे बसे इस शहर में दुनियाभर से श्रद्धालु तीर्थस्थलों, मकबरों और मस्जिदों का दौरा करने आते हैं। इस शहर को सिटी ऑफ सेंट्स यानि संतों का शहर कहा जाता है। यहां एक बहुत फेमस प्रल्हादपुरी मंदिर है। कहा जाता है इस मंदिर को राजा हिरण्यकश्यप के बेटे प्रल्हाद ने विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह के सम्मान में बनवाया था।
कलश घाटी
कलश लोग अधिकतर बुमबुरेत, रुम्बुर और बीरिर नाम की तीन घाटियों में रहते हैं जो उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा राज्य के चित्राल जिले का हिस्सा है। यहां के लोग कलश भाषा बोलते हैं और इस क्षेत्र को "कलश देश" कहते हैं। यह जनजाति पाकिस्तान के सबसे कम अल्पसंख्यकों की श्रेणी में गिनी जाती है। पाकिस्तान के शहरों से दूर बसी इस घाटी में जीवन बेहद अलग है। हल्की नीली आंखों वाले कलशा लोग अपने रंगीन परिधान और बहुदेववादी धर्म के लिए जाने जाते हैं। इन लोगों को नृत्य करना और पारंपरिक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाना पसंद होता है। साल में तीन बार इनके वार्षिक त्योहार आते हैं। मई में चिलम जोशी, सितंबर में उचाउ और सर्दियों में संक्रांति के समय चावमोस। अगर आप यहां यात्रा करना चाहते हैं तो वार्षिक त्योहार के दौरान सबसे अच्छा समय रहेगा।
काघन घाटी
पाकिस्तान के लोगों के अलावा ये घाटी पर्यटकों की भी सबसे फेवरेट जगह है। मानसेहरा जिले की इस वादी पर जाकर आपको जन्नत सा अहसास होगा। यहां नदी के आस-पास पहाड़ और हरियाली का अद्भुत मेल देखकर आपकी आंखे खुली की खुली रह जाएंगी। ये खूबसूरत जगह बालाकोट से महज 64 किलोमीटर की दूरी पर है।