History Of Bihar : भारत का हर एक राज्य पर्यटन की दृष्टि से खास है। हर राज्य, हर शहर एक अलग संस्कृति, इतिहास और कहानी कहता है। सब में कुछ न कुछ खास है, लेकिन इस खास को आप कितना जानते हैं? पूरे देश की बात नहीं, लेकिन आप अपने राज्य को कितना जानते हैं, ये सवाल जरूर करेंगे।
हम अपने शहर और राज्य की तारीफ दूसरों के सामने करते हैं लेकिन आपके राज्य में क्या-क्या खास है और इसका इतिहास कितना समृद्ध है, ये जरूर जान लीजिए, ताकि गर्व हो कि हम भारतीय होने के साथ ही अपने राज्य के निवासी है। इसी कड़ी में शुरुआत करते हैं बिहार से। बिहार भारत का पूर्वी राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। जनसंख्या के लिहाज से देश की तीसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार कई कारणों से प्रसिद्ध है। यह महात्मा बुद्ध, महावीर, चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे महान लोगों से संबंधित है। लेकिन क्या आपको पता है कि बिहार का नाम बिहार कैसे पड़ा और पहले इस स्थान को क्या कहा जाता था?
मेरा भारत-मेरा राज्य सीरीज में जानिए बिहार के इतिहास के बारे में और कैसे और कब पड़ा बिहार का नाम, इस राज्य की क्या है खास बात।
बिहार का इतिहास
भारत का हर एक राज्य अपनी अलग सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है। लेकिन जब बात आती है "गौरव और ज्ञान की भूमि" की, तो बिहार का नाम सबसे ऊपर आता है। बिहार सिर्फ बाढ़, राजनीति और पलायन से जुड़ा हुआ राज्य नहीं है बल्कि यह उस सभ्यता की नींव है जहां से भारत ने सोचने, समझने और सवाल करने की शुरुआत की। बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन इतिहास और ज्ञान की दृष्टि से यह शायद सबसे पहला है।
कैसे पड़ा बिहार नाम?
बिहार नाम कोई संयोग नहीं है बल्कि इस राज्य की विरासत की पहचान है। बिहार वह स्थान है जहां बुद्ध ने ज्ञान दिया, जहां भिक्षुओं ने ध्यान लगाया और जहां से पूरी दुनिया को शांति का मार्ग मिला। ईसा पूर्व छठी सदी में, बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ। उसके बाद यह भूमि हजारों भिक्षुओं का घर बन गई। वे जंगलों में शांति से तप करते, ध्यान लगाते और ज्ञान बांटते। भिक्षुओं के रहने और साधना करने के स्थान को 'विहार' कहा जाता था। संस्कृत में विहार का अर्थ है, मठ या आश्रम।
समय बदला और बदलते वक्त के साथ शब्दों का उच्चारण बदला। 'विहार' शब्द धीरे-धीरे 'बिहार' में बदल गया। मुगल काल और बाद में अंग्रेजों ने भी इसी नाम को अपना लिया।
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नालंदा विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञान का स्थल
भिक्षुओं के 'विहार' में नालंदा, विक्रमशिला, ओदंतपुरी, जैसे सैकड़ों विहार इस भूमि पर बस गए। नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे महान विश्वविद्यालयों की स्थापना यहीं हुई थी, जो दुनियाभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। आज का बिहार, उस बौद्ध विरासत की पहचान है, जिसने पूरी दुनिया में शांत, ज्ञान और विवेक का संदेश दिया। आधुनिक बिहार तेजी से बदल रहा है, विकसित हो रहा है लेकिन इसकी आत्मा वही है, जो कभी 'विहारों' में बसती थी। जहां ज्ञान, जागरूकता, साधना और संघर्ष था।
बिहार के प्रबुद्ध लोग
बिहार के इतिहास पर नजर डालें तो यह वहीं धरती है जहां,
- महात्मा बुद्ध ने बोधगया का ज्ञान प्राप्त किया था।
- महावीर स्वामी ने जैन धर्म को दिशा दी।
- चाणक्य की नीतियों ने मौर्य साम्राज्य को खड़ा किया।
- आर्यभट्ट ने गणित और खगोलशास्त्र में अद्वितीय योगदान दिया।