कोलकाता का नाम सुनते ही लोग तरह-तरह की मिठाईयों के ख्वाब देखने लगते हैं। हर व्यक्ति का कोलकाता की मिठाइयों के प्रति प्यार बेहद अलग है। कोलकाता का सोदेंश हो या फिर चमचम मिठाई हर किसी की अपनी एक अलग पहचान है। यहां की मिठाइयों को जितना स्थानीय लोग पंसद करते हैं उतना ही बाहर से आने वाले लोगों को भी यह मिठाइयां बेहद लुभाती हैं। खासतौर पर लोग यहां कि पुरानी दुकानों की मिठाइयां खाना ज्यादा पंसद करते हैं।
चखना चाहते हैं सबसे स्वादिष्ट मिठाइयों का स्वाद तो इस शहर की पांच पुरानी दुकानों पर जाना न भूलना
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इस दुकान में जाते ही आपको एक ऐसी चीज देखने को मिलेगी जो हर किसी के आकर्षण का केन्द्र है। इस दुकान में एक घड़ी है जो कुक और केलवे द्वारा बनाई गई एक अंग्रेजी घड़ी है, जिसमें बंगाली नंबर होते हैं। यह मिठाई की दुकान 1826 में दोबारा स्थापित की गई थी।तब से लेकर आजतक यह दुकान इस शहर का गौरव रहा है। इस दुकान की सबसे मशहूर और लजीज चीज़ है लेडिकेनी।लेडिकनी का इजाद तब हुआ जब भारत के तत्कालीन वायसराय, चार्ल्स जॉन कैनिंग की पत्नी अपने जन्मदिन पर एक खास कैंडी चाहती थी। इस कैंडी को लीडीकेनी के नाम से जाना जाता है।
यह दुकान 1885 में गणेश चंद्र मुलिक द्वारा बनाई गई थी और आज पूरे शहर में इसकी कई शाखाएँ हैं। इस मिठाई की दुकान में सबसे पहले गुड़ सोंदेश बनाए जाते हैं , जिसे नोलर गोरे सोंदेश और कोरापैक सोंदेश के नाम से जाना जाता है। आज बालाराम मुलिक और राधारम मुल्लिक एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई पहचानता है, और वास्तव में, यह अभी भी अपने उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ मिठाई के लिए जाना जाता है। इस दुकान की मिठाइयों का बोलबाला आप इस बात से समझ सकते हैम कि उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल ने अपने लंदन स्थित आवास पर यहां कि मिठाइयां मंगवाई थी।
1841 में इस दुकान को दोबारा खोला गया था। आज शहर भर में इस दुकान की कई अन्य शाखाएं हैं। यह दुकान सोंदेश मिठाइयों के लिए बेहद मशहूर है। अगर आप भी बेहतरीन मिठाइयों का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो आपको इस दुकान का रुख जरूर करना चाहिए। इस दुकान में आम सोंदेश भी मिलता है।
रोसमलाई के मूल निर्माता, केसी दास कोलकाता में बेहद नामी -जामी व्यक्ति है।के.सी दास की यह दुकान 1866 में वापस स्थापित की गई थी , तब से लेकर आज तक इस दुकान ने अपने ग्राहकों को स्वाद के मामले में कभी भी निराश नहीं किया है। सिर्फ रोसमलाई ही नहीं बल्कि के.सी दास स्वादिष्ट रसगुल्ला बनाने के लिए भी काफी मशहूर हैं। के.सी दास ने रसगुल्लों को वैक्यूम के डिब्बे में बेचना शुरू करके मिठाई के क्षेत्र में क्रांति ला दी थी। आप जितने चाहें उतने डिब्बे ले सकते हैं और उन्हें घर ले जा सकते हैं!