हिलोरे मारतीं लहरें, गगनचुंबी इमारतें, एक ओर अथाह समंदर तो दूसरी ओर मुंबई शहर, शाम बिताने के लिए इससे खूबसूरत जगह भला क्या हो सकती है! शाम में चकमक रोशनी भरी सड़कें इसे और खूबसूरत बनाती हैं। हम बात कर रहे हैं मुंबई के हॉट टूरिस्ट प्वाइंटों में शुमार 'मरीन ड्राइव' की। मरीन ड्राइव की बात ही निराली है। खासकर शाम के समय स्ट्रीट लाइट की रोशनी में नहाई ये जगह किसी महारानी के गले का हार लगती हैं। शायद इसलिए इसे 'क्वीन नेकलेस' भी कहा गया है। हममें से कई लोग इसका इतिहास नहीं जानते होंगे। आज हम आपको इसी मरीन ड्राइव की कहानी बताते हैं:
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Marine Drive, Mumbai
- फोटो : Pixa
मुंबई के गिरगांव चौपाटी से नरीमन प्वाइंट तक की सड़क को मरीन ड्राइव के नाम से जाना जाता है। मुंबईवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए मरीन ड्राइव आकर्षण का केंद्र होती है। क्या आप जानते हैं कि मुंबई का मरीन ड्राइव एक बड़े प्रोजेक्ट के फेल होने का फलाफल है? जी हां, एक प्रोजेक्ट जो काफी प्रयासों के बावजूद फेल हो गया और तब जाकर मुंबई वासियों को मिला- मरीन ड्राइव। आइए, जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है!
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Marine Drive
- फोटो : ANI
दरअसल, नरीमन प्वाइंट को मालाबार हिल से जोड़ने का एक प्रोजेक्ट था। ये प्रोजेक्ट सबसे पहले साल 1860 में शुरू हुआ था, लेकिन किसी कारण से ये पूरा हो नहीं पाया। उसके बाद साल 1920 में फिर से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ, लेकिन इस बार भी नाकामी हाथ लगी। कई तरह के झमेले और कई बार प्लान फेल होने के कारण एक बार फिर से यह परियोजना पूरी नहीं हो पाई।
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Marine Drive
- फोटो : ANI
इस परियोजना में शुरुआत में 1500 एकड़ जमीन का इस्तेमाल होना था, फिर इसे घटा कर 440 एकड़ किया गया। इसके बाद मिलिट्री ने 235 एकड़ जमीन ले ली और कुछ जमीन पर अन्य कार्य शुरू हो गए। ऐसे में इस परियोजना की महज 17 एकड़ जमीन बची, जो कि आज मरीन ड्राइव है।
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Marine Drive
- फोटो : ANI
यहां समंदर और शहर के बीच जो दीवार दिखती है, उसे बनाने का कार्य ब्रिटिश काल में साल 1915 में शुरू हुआ था। इसे बनाने में पांच साल लग गए। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि निर्माण के दशकों बाद तक इसे किसी तरह की मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ी।