Phulera Dooj: इस वर्ष होली 13 और 14 मार्च 2025 को मनाई जा रही है। होली को लेकर लोग उत्साहित हैं। रंगों के इस पर्व का उत्साह श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा वृंदावन में होली के कुछ दिन पहले से ही देखने को मिलने लगता है। होली शुरू होने से पहले मथुरा-बरसाना में रंगों की छटा बिखरने लगती है। वहीं होली से लगभग 10-15 दिन पहले फूलों की होली खेली जाती है, जिसे फुलेरा दूज कहा जाता है। फुलेरा दूज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष फुलेरा दूज का पर्व 1 फरवरी को मनाया जा रहा है।
फुलेरा दूज शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है, क्योंकि इसे सर्वसिद्धि योग का प्रतीक माना जाता है। इसे होली के शुभारंभ के तौर पर मनाते हैं। मथुरा-वृंदावन में फुलेरा दूज का पर्व विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर और अन्य प्रमुख कृष्ण मंदिरों में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा-रानी को गुलाल अर्पित किया जाता है और फाग उत्सव का आयोजन होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण स्वयं भक्तों के साथ होली खेलने के लिए आते हैं।
अगर आप फुलेरा दूज के मौके पर फूलों की होली का आनंद लेना चाहते हैं तो बरसाना जा सकते हैं। आइए जानते हैं फुलेरा दूज मनाने के लिए मथुरा बरसाना के सफर की पूरी जानकारी।
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phulera dooj 2025
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कैसे मनाया जाता है यह उत्सव?
- बांके बिहारी मंदिर में इस दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है और गुलाल-अभिषेक किया जाता है।
- मंदिरों में कीर्तन और भजन संध्या का आयोजन होता है।
- भक्तगण एक-दूसरे को गुलाल और अबीर लगाकर इस पावन पर्व को मनाते हैं।
- वृंदावन, नंदगांव, बरसाना और गोकुल में इस दिन से होली महोत्सव की शुरुआत हो जाती है।
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बरसाना में फुलेरा दूज
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बरसाना में फुलेरा दूज
राधा रानी बरसाना में रहती हैं, इसलिए बरसाना के लोग फुलेरा दूज मनाते हैं और फूलों से होली खेलते हैं। आप फूलों की होली खेलने और अद्भुत नजारे के लिए बरसाना और वृंदावन जा सकते हैं। बांके बिहारी के मंदिर में भी इस दिन काफी भीड़ उमड़ती है।
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बरसाना
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कैसे पहुंचें बरसाना
दिल्ली या आसपास के रहने वाले हैं तो कुछ घंटों का सफर तय करके बरसाना जा सकते हैं। दिल्ली से बरसाना 158 किमी की दूरी पर है, जहां पहुंचने में लगभग 4 घंटे का समय लगता है। मथुरा से बरसाना 45 किमी दूर है। हवाई मार्ग, सड़क मार्ग या रेल मार्ग से आप आसानी से बरसाना पहुंच सकते हैं।
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फुलेरा दूज
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क्यों मनाया जाता है फुलेरा दूज?
भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की प्रेम कहानी प्रचलित है। कहते हैं एक बार व्यस्त होने के कारण कान्हा राधा जी से मिलने नहीं जा सके। इस पर राधा रानी उदास हो गईं। उनकी उदासी से जंगल, पेड़-पौधे और फूल सूखने लगे। जब कृष्ण को राधा का हाल पता चले तो वह उनसे मिलने पहुंचे। कन्हैया को देख राधारानी बहुत खुश हो गईं और मुरझाए फूल फिर से खिल उठे। इन्हीं खिले फूलों से राधा रानी संग गोपियों ने कान्हा के साथ होली खेली। तब से इस दिन को फुलेरा दूज के तौर पर मनाया जाने लगा।