Goa Taxi Rate: गोवा के पर्यटन उद्योग की छवि बिगाड़ रहे हैं टैक्सियों के आसमान छूते किराए
गोवा में स्थानीय टैक्सी चालकों और उनकी यूनियनों की पकड़ इतनी मजबूत है कि सरकार ने भी इस ओर आंखें मूंद रखी हैं। ऐप-आधारित ओला व उबर जैसी सेवाओं को स्थानीय यूनियनों ने कभी यहां पांव ही नहीं जमाने दिया।
एयरपोर्ट से आवाजाही के लिए टैक्सी महंगी
टैक्सी चालकों के मनमाने रवैए के कारण बीती पांच जनवरी को उत्तर गोवा के मोपा में शुरू हुए नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आवाजाही करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि उनको एयरपोर्ट आने-जाने के लिए कुछ मामलों में विमान के टिकट से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है। मिसाल के तौर पर, इस संवाददाता ने गोवा से बेंगलुरु तक का हवाई टिकट तो तीन हजार में खरीदा था, लेकिन दक्षिण गोवा के कोलवा से नए एयरपोर्ट तक की 62 किमी की दूरी तय करने के लिए टैक्सी के किराए के तौर पर साढ़े तीन हजार रुपए खर्च करने पड़े।
गोवा में स्थानीय टैक्सी चालकों और उनकी यूनियनों की पकड़ इतनी मजबूत है कि सरकार ने भी इस ओर आंखें मूंद रखी हैं। ऐप-आधारित ओला व उबर जैसी सेवाओं को स्थानीय यूनियनों ने कभी यहां पांव ही नहीं जमाने दिया।
हवाई टिकट से ज्यादा महंगा टैक्सी का किराया
दिल्ली से नए साल की छुट्टियां बिताने कलंगुट पहुंचे शरद कुमार कहते हैं, "मुझे 40 किमी की दूरी तय करने के लिए 2500 रुपये देने पड़े। मोपा एयरपोर्ट तक पहुंचने का जितना खर्च है, उससे कम में गोवा से मुंबई तक का हवाई टिकट खरीदा जा सकता है।" सिर्फ पर्यटकों ही नहीं बल्कि दक्षिण गोवा में रहने वाले लोगों के लिए भी नए एयरपोर्ट तक पहुंचना भारी सिरदर्द साबित हो रहा है। बेनॉलिम में रहने वाले एग्नेल फर्नांडीज कहते हैं, "सरकार को पहले टैक्सी की दरें तय करनी चाहिए। आसमान छूते किराए के कारण पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी हो रही है।"
सरकार की दलील है कि पर्यटकों की सहूलियत के गोवा टैक्सी एप बनाया गया है। लेकिन कोई भी टैक्सी मालिक या चालक इसमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। स्थानीय इतिहासकार संजीव सरदेसाई बताते हैं, "हाल के वर्षों में एक पर्यटन स्थल के तौर पर गवा की लोकप्रियता काफी बढ़ी है और खासकर क्रिसमस से नए साल तक यहां कहीं तिल धरने तक की जगह नहीं होती। टैक्सी चालक इस हालत का फायदा उठा रहे हैं। अगर सरकार ने इस पर अंकुश नहीं लगाया तो सोने के अंडे देने वाले पर्यटन उद्योग की असमय ही मौत हो जाएगी। टैक्सी चालकों की मनमानी के कारण पर्यटक बेहद बुरे अनुभव के साथ यहां से लौटते हैं।"
टैक्सी चालक वसूलते हैं मनमुताबिक किराया
पर्यटन उद्योग से जुड़े ओरलांडो नन्स कहते हैं, "यहां टैक्सियों की तादाद तो हजारों में है। आपको हर जगह टूरिस्ट टैक्सी मिल जाएगी लेकिन उनके पास कोई छपा हुआ रेट कार्ड नहीं है। उनकी जुबान ही रेट कार्ड है। सरकार इस मामले में कई ठोस नीति बनाने में नाकाम रही है।" वह बताते हैं कि यहां टैक्सी की दरें नब्बे के दशक से ही ज्यादा हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तो यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं।